काव्य में रुचि रखने वालों के लिए और विशेषतया कवियों के लिए तो गणों की जानकारी होना बहुत जरूरी है ।
गण आठ माने जाते हैं!
१ - य - यगण
२ - मा - मगण
३ - ता - तगण
४ - रा - रगण
५ - ज - जगण
६ - भा - भगण
७ - न - नगण
८ - स - सगण - सलगा
इसके लिए मैं एक सूत्र को लिख रहा हूँ-
"यमाताराजभानसलगा"
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य - यगण
यमाता
I S S
लघु - गुरू - गुरू
उदाहरण- लगाना, दिखाना आदि.।
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मा - मगण
मातारा
S S S
गुरू - गुरू - गुरू
उदाहरण- दोराहा, सालाना आदि.।
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ता - तगण
ताराज
S S I
उदाहरण- सामान, दूकान आदि.।
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गुरू - गुरू - लघु
रा - रगण
राजभा
S I S
उदाहरण- पालना, थामना आदि.।
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गुरू - लघु - गुरू
ज - जगण
जभान
I S I
उदाहरण- मचान, लगान आदि.।
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लघु - गुरू - लघु
भा - भगण
भानस
S I I
उदाहरण- सादर, भाषण आदि.।
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गुरू - लघु - लघु
न - नगण
नसल
I I I
उदाहरण- गमन, वचन आदि.।
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लघु - लघु - लघु
स - सगण
सलगा
I I S
लघु - लघु - गुरू
उदाहरण- बचना, सपना आदि.।
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कहिए मित्रों!
सरल है ना गणों को याद रखना!
अपको केवल निम्न सूत्र को कण्ठस्थ करना है!
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यमाताराजभानसलगा
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समय मिला तो आगामी किसी पोस्ट में
छन्दों में इनका प्रयोग भी बताऊँगा...!