बातें व्याकरण की "अनुस्वार का प्रयोग" हिन्दी
वालों! बड़े दुःख की बात है कि हम हिन्दी वालों ने
ही हिन्दी की सबसे बड़ी दुर्दशा की है। सच कहा जाय तो हम आज भी हिन्दी में
बिन्दी अर्थात् अनुस्वार का प्रयोग करना नहीं जानते हैं। मैं यह बात कम
पढ़े-लिखे नहीं बल्कि हिन्दी पढ़ानेवाले आचार्यों की कर रहा हूँ। जो पञ्चमाक्षर का
प्रयोग अपने लेखन में नहीं कर रहे हैं। बेड़ा गर्क हो एन.सी.ई.आर.टी. का जिसने
हिन्दी के सरलीकरण के नाम पर हिन्दी को व्याकरण से दूर कर दिया है। क ख ग घ ड. ("क" परिवार अर्थात् कवर्ग) च छ ज झ ञ
("ख" परिवार अर्थात् चवर्ग) ट ठ ड ढ ण ("ट" परिवार अर्थात् टवर्ग) त थ द ध न
("त" परिवार अर्थात् तवर्ग) प फ ब भ म ("प" परिवार अर्थात् पवर्ग) उपरोक्त पच्चीस व्यञ्जन स्पर्श व्यञजनों की श्रेणी में आते हैं। अतः
अनुस्वार अर्थात् बिन्दी भी इन्हीं के अनुसार इनके पञ्माक्षर का प्रयोग करके
लगायी जानी चाहिए। क्योंकि इन पाँचों परिवारों (वर्गों) के जो अक्षर हैं वे अपने
परिवार के वर्णों को ही स्वीकार करेंगे। यहाँ
मैं कुछ शब्द लिख रहा हूँ। गंगा चंचल ठंडा बंदर रंभा अनुस्वार
के उपरोक्त प्रयोग हिन्दी व्याकरण के अनुसार सही नहीं हैं। हिन्दी भाषा वैज्ञानिक भाषा कहलाती है
इसलिए व्याकरण के अनुसार अनुस्वार का प्रयोग भी पञ्चमाक्षर के अनुसार ही करना
चाहिए। गंगा
को "गड्.गा" लिखना सही होगा। चंचल
के "चञ्चल" लिखना सही होगा। ठंडा
को "ठण्डा" लिखना सही होगा। बंदर
को "बन्दर" लिखना सही होगा। रंभा
को "रम्भा" लिखना सही होगा। |
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

सार्थक जानकारी |
जवाब देंहटाएं