छन्द आते नहीं, भाव आते हैं जब। भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।। देखने मेह को जब गये खेत में, बूँद बारिश की गुम हो गई रेत में, मीत आते नही, हम बुलाते हैं जब। भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।। दिल धड़कता बहुत, मखमली बात में, मन फड़कता बहुत, नेह-जज्बात में, गुनगुनाते नही, पास आते हैं जब। भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।। मुस्कराते तो हैं, खिलखिलाते नहीं, टिमटिमाते तो हैं, जगमगाते नहीं, स्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब। भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।। |
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मुस्कराते तो हैं, खिलखिलाते नहीं,
जवाब देंहटाएंटिमटिमाते तो हैं, जगमगाते नहीं,
स्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब।
भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।
Ati sundar Shashtri ji
"मीत आते नहीं, हम बुलाते हम बुलाते हैं जब।
जवाब देंहटाएंस्वप्न जाते नहीं, याद आते है जब ।"
देखने मेह को जब गये खेत में,
जवाब देंहटाएंबूँद बारिश की गुम हो गई रेत में,
कितना सूक्ष्म खयाल है. बहुत सुन्दर
बड़ी मधुर अभिव्यक्ति है।
जवाब देंहटाएंatyant khoobsurat!
जवाब देंहटाएंबेहद उम्दा और खूबसूरत गीत्।
जवाब देंहटाएंohho ho..kya baat hai :)
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर रचना ...अच्छी भावाभिव्यक्ति
जवाब देंहटाएंगीत अपने आप में अच्छा है , पर थोड़ी दुविधा है , साफ़ करें ..भाव आते नहीं गीत गाते हैं जब ..यानि बिना भाव के गीत ?...गाया तो जा सकता है ..पर बिना भाव के गीत लिखना शायद बेमायने होता है ..ये मेरी अपनी सोच है , मुझे थोड़ा अटपटा सा लग रहा है । ठीक समझें तो अपनी बात रखें ।
जवाब देंहटाएंबहुत ही बहतरीन..... बहुत खूब!
जवाब देंहटाएंलाजवाब भाव,रस और प्रवाहमयता है इस सुन्दर गीत में....मन आनंदित हो गया पढ़कर...
जवाब देंहटाएंआभार.
bahut sunder rachna.
जवाब देंहटाएंस्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब।
जवाब देंहटाएंWaah! bahut Sundar....Dhanywaad.
बहुत अच्छी प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंहंसना ज़रूरी है क्यूंकि …हंसने से सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।