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मंगलवार, 17 अगस्त 2010

"...गीत गाते हैं जब.." (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

छन्द आते नहीं, भाव आते हैं जब।
भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।

देखने मेह को जब गये खेत में,
बूँद बारिश की गुम हो गई रेत में,
मीत आते नही, हम बुलाते हैं जब।
भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।

दिल धड़कता बहुत, मखमली बात में,
मन फड़कता बहुत, नेह-जज्बात में,  
गुनगुनाते नही, पास आते हैं जब।
भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।

मुस्कराते तो हैं, खिलखिलाते नहीं,
टिमटिमाते तो हैं, जगमगाते नहीं,
स्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब।
भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।

15 टिप्‍पणियां:

  1. मुस्कराते तो हैं, खिलखिलाते नहीं,
    टिमटिमाते तो हैं, जगमगाते नहीं,
    स्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब।
    भाव आते नहीं, गीत गाते हैं जब।।
    Ati sundar Shashtri ji

    जवाब देंहटाएं
  2. "मीत आते नहीं, हम बुलाते हम बुलाते हैं जब।
    स्वप्न जाते नहीं, याद आते है जब ।"

    जवाब देंहटाएं
  3. देखने मेह को जब गये खेत में,
    बूँद बारिश की गुम हो गई रेत में,

    कितना सूक्ष्म खयाल है. बहुत सुन्दर

    जवाब देंहटाएं
  4. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

    जवाब देंहटाएं
  5. बेहद उम्दा और खूबसूरत गीत्।

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर रचना ...अच्छी भावाभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  7. गीत अपने आप में अच्छा है , पर थोड़ी दुविधा है , साफ़ करें ..भाव आते नहीं गीत गाते हैं जब ..यानि बिना भाव के गीत ?...गाया तो जा सकता है ..पर बिना भाव के गीत लिखना शायद बेमायने होता है ..ये मेरी अपनी सोच है , मुझे थोड़ा अटपटा सा लग रहा है । ठीक समझें तो अपनी बात रखें ।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही बहतरीन..... बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  9. लाजवाब भाव,रस और प्रवाहमयता है इस सुन्दर गीत में....मन आनंदित हो गया पढ़कर...

    आभार.

    जवाब देंहटाएं
  10. स्वप्न जाते नहीं, याद आते हैं जब।
    Waah! bahut Sundar....Dhanywaad.

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    हंसना ज़रूरी है क्यूंकि …हंसने से सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

    जवाब देंहटाएं

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