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मंगलवार, 28 सितंबर 2010

"पुराना राग" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

"एक बहुत पुरानी रचना"
कितनी ताकत छिपी शब्द की धार में।
जीत की गन्ध आने लगी हार में।।

वो तो बातों से नश्तर चुभोते रहे,
हम तो हँसते हुए, घाव ढोते रहे,
घात ही घात था उनके हर वार में।
जीत की गन्ध आने लगी हार में।।

मेरे धीरज को वो आजमाते रहे,
हम भी दिल पर सभी जख्म खाते रहे,
पीठ हमने दिखाई नही प्यार में।
जीत की गन्ध आने लगी हार में।।

दाँव-पेंचों को वो आजमा जब चुके,
हार थक कर के अब वार उनके रुके,
धार कुंठित हुई उनके हथियार मे।
जीत की गन्ध आने लगी हार में।।

संग-ए-दिल बन गया मोम जैसा मृदुल,
नेह आया उमड़ सिन्धु जैसा विपुल,
हार कर जीत पाई थी उपहार में।
जीत की गन्ध आने लगी हार में।। 

19 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना
    और इसी के साथ साबित हो गया कि रचना पुरानी नहीं होती है

    जवाब देंहटाएं
  2. aadrniy shastir saahb har kr bhi jitne ki jo priklpna he voh bhut khub he bdhayi ho. akhtar khan akela kota rajsthaan

    जवाब देंहटाएं
  3. शास्त्री जी,
    पंक्तियाँ उद्धृत करना मुझे भाता नहीं है, परन्तु आज रहा नहीं गया, ये पंक्तियाँ सीधे दिल में उतर गई

    बहुत पावन रचना ........

    मेरे धीरज को वो आजमाते रहे,
    हम भी दिल पर सभी जख्म खाते रहे,
    पीठ हमने दिखाई नही प्यार में।
    जीत की गन्ध आने लगी हार में।।

    www.albelakhatri.com पर पंजीकरण चालू है,

    आपको अनुरोध सहित सादर आमन्त्रण है

    -अलबेला खत्री

    जवाब देंहटाएं
  4. मन में जब ठेस लगती है तो ऐसे ही भाव निकलते हैं ..बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने .......

    पढ़िए और मुस्कुराइए :-
    जब रोहन पंहुचा संता के घर ...

    जवाब देंहटाएं
  6. जीत की गंध आने लगी हार में ...नए भावों को उद्घाटित करता गीत...

    जवाब देंहटाएं
  7. सच है, अब हार में भी जीत की गंध आने लगी है।

    जवाब देंहटाएं
  8. संग-ए-दिल बन गया मोम जैसा मृदुल,
    नेह आया उमड़ सिन्धु जैसा विपुल,
    हार कर जीत पाई थी उपहार में।
    जीत की गन्ध आने लगी हार में।।
    बहुत अच्छा प्रेरणा देता गीत। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  9. जीत की गन्ध आने लगी हार में।।
    और हार कर जीतने वाला ही बाजीगर कहलाता है……………बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द, भावमय प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं
  11. सुन्दर रचना ... लाजवाब लिखा है शास्त्री जी आपने .... नमस्कार ....

    जवाब देंहटाएं
  12. .

    जीत की गंध आने लगी हार में ..बहुत अच्छी प्रस्तुति।

    .

    जवाब देंहटाएं
  13. कितनी ताकत छिपी शब्द की धार में।
    जीत की गन्ध आने लगी हार में।

    -बहुत उम्दा..पुरानी होकर भी एकदम ताजी सी.

    जवाब देंहटाएं

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