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मंगलवार, 20 सितंबर 2011

"कहीं अरमान ढलते हैं" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कहीं पर दीप जलते हैं
कहीं अरमान ढलते हैं

जहाँ बरसात होती है
वहीं पत्थर दरकते हैं

लगी हो आग जब दिल में
शरारे ही निकलते हैं

कभी सूखे के मौसम में
नहीं दरिया उबलते हैं

अमन के चमन में आकर
जुबाँ से विष उगलते हैं

शक्ल इन्सान की धर कर,
नगर में नाग पलते हैं

सुरीले सुर सजें कैसे
जहाँ तूफान चलते हैं

रूप को मोम के पुतले
घड़ी भर में बदलते हैं

27 टिप्‍पणियां:

  1. छोटे -छोटे वाक्य में बड़ी-बड़ी सी बात ||
    सूखे में जमके हुई, वो भीगी बरसात ||

    जवाब देंहटाएं
  2. सुरीले सुर सजें कैसे
    जहाँ तूफान चलते हैं

    बेहतरीन है सर!

    -----------
    कल 21/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  3. जहाँ बरसात होती है
    वहीं पत्थर पिघलते हैं

    ....बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति..

    जवाब देंहटाएं
  4. शक्ल इन्सान की धर कर,
    नगर में नाग पलते हैं
    आपने छोटे छोटे शेर मैं कितनी गहरी बात कही है /बहुत ही शानदार गजल /बहुत सुंदर शब्दों के चयन के साथ लिखी अनूठी और सार्थक रचना /बहुत बधाई आपको /
    मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है /आभार/

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत गहरी बात कही है……………सुन्दर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  6. “रूप” को मोम के पुतले
    घड़ी भर में बदलते हैं

    bahut sundar kaha

    जवाब देंहटाएं
  7. शक्ल इन्सान की धर कर,
    नगर में नाग पलते हैं....
    bahut achchhi gazal

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत ही गहरी बात कही आपने.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत ही गहरी बात कही आपने.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  10. जहाँ बरसात होती है
    वहीं पत्थर पिघलते हैं...
    बहुत ही गहरी बात कही..सार्थक और सटीक अभिव्यक्ति..

    जवाब देंहटाएं
  11. शक्ल इन्सान की धर कर,
    नगर में नाग पलते हैं
    सुंदर अभिव्यक्ति। चित्र भी अद्भुत लगाया है।

    जवाब देंहटाएं
  12. आज कल तो हर जगह नाग पलने लगे हैं ..खाली नगरों तक ही नहीं रहे .. अच्छी गज़ल

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर लिखा है आपने सर , लेकिन ये फोटो देखकर "दिग्गिया" गुस्सा जायेगा ,उसके लिये"जी"है ना ये ----

    जवाब देंहटाएं
  14. शकल इंसानों की लेकर शहर में नाग पलते हैं ...
    बहुत खूब!

    जवाब देंहटाएं
  15. बहुत सुंदर पंक्तियां,वाह, पर ये फोटो वीभत्स है,
    माफी चाहूंगा,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  16. जहाँ बरसात होती है
    वहीं पत्थर पिघलते हैं
    लगी हो आग जब दिल में
    शरारे ही निकलते हैं

    अनुभवों का निचोड़ , यही तो नई पीढ़ी के लिये अमृत-सम होता है.

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत अर्थपूर्ण और गहरी बात कह दी है आपने .......

    जवाब देंहटाएं
  18. कहीं पर दीप जलते हैं.
    कहीं अरमान ढलते हैं.

    बेहतरीन ग़ज़ल है सर,
    सादर बधाई...

    जवाब देंहटाएं

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