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शनिवार, 21 अगस्त 2021

रक्षाबन्धन "भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रक्षाबन्धन की हार्दिक शुभकामनाएँ

बहनों को मत भूलना, याद दिलाता पर्व।

रक्षाबन्धन पर्व पर, भारत को है गर्व।।

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परम्परा मत समझना, राखी का त्यौहार।

रक्षाबन्धन में निहित, होता पावन प्यार।।

--

राखी लेकर आ गयी, बहना बाबुल-द्वार।

भाई देते खुशी से, बहनों को उपहार।।

--

रक्षाबन्धन पर्व का, दिन है सबसे खास।

जिनके बहनें हैं नहीं, वो हैं आज उदास।।

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ममता की इस डोर में, उमड़ा रहा है प्यार।

भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार।।

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अपनी बहनों से कभी, मत होना नाराज।

भइया रक्षा-सूत्र की, रखना हरदम लाज।।

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कच्चे धागों में छिपी, ममता है मजबूत।

जो भाई के हृदय को, कर देती अभिभूत।।

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जरी-सूत या जूट के, धागे हैं अनमोल।

गौरव के इतिहास से, सज्जित है भूगोल।।

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राखी के दिन देश में, उमड़ा प्यार-अपार।

रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।।

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निश्छल पावन प्यार का, होता जहाँ निवेश।

सबसे न्यारा जगत में, मेरा भारत देश।।

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5 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार ,

    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (22-8-21) को "भावनाओं से हैं बँधें, सम्बन्धों के तार"(चर्चा अंक- 4164) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी। आप सभी को रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनायें
    ------------
    कामिनी सिन्हा

    जवाब देंहटाएं
  2. राखी की भावनाओं को व्यक्त करती सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  3. अति पावन अभिव्यक्ति । हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    जवाब देंहटाएं
  4. राखी के दिन देश में, उमड़ा प्यार-अपार।
    रिश्ते-नातों की चहक, देख रहा संसार।।

    वाह!!!
    लाजवाब दोहे।
    --

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत उत्तम आदरणीय सादर प्रणाम

    जवाब देंहटाएं

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