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सिसक-सिसक कर स्लेट जी रही, तख्ती ने दम तोड़ दिया है। सुन्दर लेख-सुलेख नहीं है, कलम टाट का छोड़ दिया है।। दादी कहती एक कहानी, बीत गई सभ्यता पुरानी, लकड़ी की पाटी होती थी, बची न उसकी कोई निशानी।। फाउण्टेन-पेन गायब हैं, जेल पेन फल-फूल रहे हैं। रीत पुरानी भूल रहे हैं, नवयुग में सब झूल रहे हैं।। समीकरण सब बदल गये हैं, शिक्षा का पिट गया दिवाला। बिगड़ गये परिवेश प्रीत के, बिखर गई है मंजुल माला।। |
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गुरुवार, 6 सितंबर 2018
"स्लेट और तख्ती" (प्रकाशन जयविजय-सितम्बर,2018)
बुधवार, 5 सितंबर 2018
गुरु वन्दना "श्रीगुरूदेव का वन्दन" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मंगलवार, 4 सितंबर 2018
शिक्षक दिवस "बिकता है ज्ञान" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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विद्याएँ लुप्तप्रायः
छात्र कहाँ जायें
शिक्षा का शोर
ट्यूशन का जोर
सजी हैं दूकानें
लोग लगे हैं कमाने-खाने
गुरू गायब
विद्यालयों की भरमार
जगत-गुरू के
अच्छे नही हैं आसार
जोर-शोर से मनाइए
सम्मान लुटाइए
ज्ञान की अमावस है
कल शिक्षक दिवस है
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सोमवार, 3 सितंबर 2018
रपट "स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी' की पाँचवीं पुण्यतिथि"
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मित्रों !
कल दिनांक 2 सितम्बर, 2018 को मेरे 40 साल पुराने मित्र स्व. टीकाराम पाण्डेय 'एकाकी' की पाँचवीं पुण्यतिथि पर उनका भावपूर्ण स्मरण करते हुए काव्यमयी श्रद्धांजलि समर्पित की गयी। जिसका आयोजन उनके सुपुत्र रवीन्द्र पाण्डेय "पपीहा" ने अपने शिक्षण संस्थान "ग्लोरियस एकेडेमी" बनबसा में किया। जिसकी अध्यक्षता डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' तथा संचालन डॉ. जगदीश पन्त 'कुमुद' ने किया।
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पं.टीकाराम पाण्डेय के चित्र पर माल्यार्पण पुष्प समर्पण के पश्चात काव्य गोष्ठी का प्रारम्भ श्री श्रीभगवान मित्र द्वारा माँ सरस्वती की की वन्दना और एक कृष्णभक्ति का भजन प्रस्तुत किया गया।
कार्क्रम के अन्त में अध्यक्षता कर रहे डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने सभी कवि-शायरों की रचना की समीक्षा करते हुए गोष्ठी के समापन की घोषणा की। देखिए इस अवसर केो कुछ चित्र।
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रविवार, 2 सितंबर 2018
दोहे "योगिराज का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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हे मनमोहन देश में, फिर से लो अवतार।।
सुनने को आतुर सभी, बंसी की झंकार।
मोहन आओ धरा पर, भारत रहा पुकार।।
श्री कृष्ण भगवान ने, दूर किया
अज्ञान।
युद्ध भूमि में पार्थ को, दिया अनोखा
ज्ञान।।
भारत के वर्चस्व का, जिससे हो आभास।
लगता वो ही ग्रन्थ तो, हमको सबसे
खास।।
वेद-पुराण-कुरान का, गीता में है
सार।
भगवतगीता पाठ से, होते दूर विकार।
दो माताओं का मिले, जिसको प्यार
दुलार।
वो ही करता जगत में, दुष्टों का
संहार।।
दुर्योधन जब हो गया, सत्ता मद में
चूर।
तब मनमोहनश्याम ने, किया दर्प को दूर।।
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शनिवार, 1 सितंबर 2018
दोहे "महापुरुष अवतार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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धरा-गगन में हो रही, उसकी जय-जयकार।।
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बादल नभ में छा रहे, बरस रहा है नीर।
हुआ देवकी-नन्द का, मन तब बहुत अधीर।।
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बन्दीघर में कंस की, पहरे थे संगीन।
खिसक रही वसुदेव के, पैरो तले जमीन।।
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बालकृष्ण ने जब रची, लीला स्वयं विराट।
प्रहरी सारे सो गये, सब खुल गये कपाट।।
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जब-जब अत्याचार से, लोग हुए लाचार।
तब-तब लेते धरा पर, महापुरुष अवतार।।
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जग-तप, पूजा-पाठ सब, हुए अकारथ आज।
सीधी-सच्ची राह से, भटका हुआ समाज।।
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बढ़ते पापाचार से, हुए सभी बेहाल।
कलयुग तुम्हें पुकारता, आ जाओ गोपाल।।
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जग के माया जाल में, जकड़े सारे लोग।
भोगवाद के दैत्य को, कौन सिखाये योग।।
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शुक्रवार, 31 अगस्त 2018
दोहे "कृष्ण सँवारो काज" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
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आया भादो मास है, कृष्ण सँवारो काज।।
मनुज दनुज अब बन गया, भूल गया है शील।
देख अकेली नार को, बात करे अशलील।।
भोली चिड़िया देखकर, झपट रहा है बाज।
हुआ बहुत लाचार अब, जंगल का अधिराज।।
ईंधन पर अब हो गयी, मँहगाई की मार।
देखो डीजल कर गया, सत्तर रुपया पार।।
जिनको मत अपना दिया, वो ही हैं अब मौन।
जनता के दुख-दर्द की, बात सुने तब कौन।।
सूखे आँसू आँख के, सूने-सूने नैन।
अच्छे दिन के लिए सब, अब तक हैं बेचैन।।
कल सूखे का कोप था, आज बाढ़ की मार।
है कुदरत के सामने, शासन भी लाचार।।
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