"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

सोमवार, 28 जून 2010

“नभ में काले बादल छाये!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

बारिश का सन्देशा लाये!!  
नभ में काले बादल छाये!
IMG_1525 छम-छम बून्दें पड़ती जल की,  
ध्वनि होती कल-कल,छल-छल की,  
जग की प्यास बुझाने आये!  
नभ में काले बादल छाये!   
IMG_1631 जल से भरा धरा का कोना,  
हरी घास का बिछा बिछौना,  
खुश होकर मेंढक टर्राए!  
नभ में काले बादल छाये!      
IMG_1628पेड़ स्वच्छ हैं धुले-धुले हैं,  
पत्ते भी उजले-उजले हैं,  
फटी दरारें भरने आये!  
नभ में काले बादल छाये!    

18 टिप्‍पणियां:

  1. हाय! इन बादलों को देखकर तो हमारा दिल भी डोल गया………बडी मस्त रचना लिखी है।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत खूब शास्त्री जी .........मजा आ गया !

    जवाब देंहटाएं
  3. मतलब वहां बारिश हो रही है. हम तो इधर कड़ी धूप झेल रहे हैं अभी भी. सुन्दर रचना.

    जवाब देंहटाएं
  4. आज सुबह दिल्ली में बादल छाये थे

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर कविता...चित्रों में ही बादलों को देख आनंदित हो रहे हैं....शायद दिल्ली दूर है बादलों के लिए अभी

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत सुंदर...मेरे यहा भी आज बादल छाए हुए है...

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी, प्रणाम. बहुत दिन हो गए. न कंप्यूटर पर बैठा, न किसी ब्लॉग पर गया और न ही कुछ गुफ्तगू कर पाया. इसका मुख्य कारण था घर में शादी का माहौल. क्या करता बहन की शादी जो है. फिर भी आज समय निकाल कर कुछ ब्लॉग के चक्कर काट रहा हूँ. अब ब्लॉग के चक्कर लगाऊ और आपके ब्लॉग पर न आऊ ऐसा नहीं हो सकता. लेकिन आज आपकी जो कविता पढ़ी तो दिल खुश हो गया. लेकिन विडम्बना यह है की भारत में इस समय कई जगह बरसात है. हर बार होती है लेकिन मेरे हिसार से पता नही ऊपर वाले को क्या नाराजगी है. बरसात आती ही नहीं. लेकिन आपकी कविता की कुछ लाइने दिल को सुकून पहुंचाती है.

    छम-छम बून्दें पड़ती जल की,
    ध्वनि होती कल-कल,छल-छल की,
    जग की प्यास बुझाने आये!
    नभ में काले बादल छाये!

    बहुत ही सुन्दर रचना. आभार

    जवाब देंहटाएं
  8. jalan ho rahi hai aap se guru ji...
    kitna achey mausam mein hain aap aur ek hum hain garmi mein tapp rahey hain!

    जवाब देंहटाएं
  9. बढ़िया लगी चित्रकाव्य झलकी!

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत सुंदर प्रस्तुति...शास्त्री जी रचना अच्छी लगी..धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  11. मंगलवार 29 06- 2010 को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है आभार


    http://charchamanch.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  12. आदरणीय शास्त्री जी ..... आजकल कुछ व्यस्तता ज़्यादा है.... फिर भि कोशिश पूरी रहती है..... आपके ब्लॉग को पढने की....आज की यह रचना बहुत अच्छी लगी....

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत बढ़िया!





    क्या आपने हिंदी ब्लॉग संकलन के नए अवतार हमारीवाणी पर अपना ब्लॉग पंजीकृत किया?

    हमारीवाणी.कॉम



    हिंदी ब्लॉग लिखने वाले लेखकों के लिए हमारीवाणी नाम से एकदम नया और अद्भुत ब्लॉग संकलक बनकर तैयार है।

    अधिक पढने के लिए चटका लगाएँ:

    http://hamarivani.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  14. waah mayank ji !

    nihaal kar diya

    bahut khoob rachana !

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails