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शनिवार, 15 जनवरी 2011

"धूप अब खिलने लगी है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

कायदे से धूप अब खिलने लगी है।
लेखनी को ऊर्जा मिलने लगी है।।

दे रहा मधुमास दस्तक, शीत भी जाने लगा,
भ्रमर उपवन में मधुर संगीत भी गाने लगा,
चटककर कलियाँ सभी खिलने लगी हैं।
लेखनी को ऊर्जा मिलने लगी है।।

कल तलक कुहरा घना था, आज बादल छा गये,
सींचने आँचल धरा का, धुंध धोने आ गये,
पादपों पर हरितिमा खिलने लगी है।
लेखनी को ऊर्जा मिलने लगी है।।

सब पुरातन पात पेड़ों से, स्वयं झड़ने लगे हैं,
बीनकर तिनके परिन्दे, नीड़ को गढ़ने लगे हैं,
अब मुहब्बत चाके-दिल सिलने लगी है।
लेखनी को ऊर्जा मिलने लगी है।। 

18 टिप्‍पणियां:

  1. नई धूप हम सबके जीवन में नई ऊर्जा भरे।

    जवाब देंहटाएं
  2. वाकई यह धूप जन-जीवन को नई उर्जा दे रही है । उंगलियां व्यवस्थित चलने लगी हैं.
    लेखनी को भी उर्जा मिलने लगी है.

    जवाब देंहटाएं
  3. यह धूप नवजीवन के नवागमन की भी परिचायक है.

    जवाब देंहटाएं
  4. सुन्दर रचना आज तो सचमुच अच्छी धूप खिली है।

    जवाब देंहटाएं
  5. इस नव उर्जा को क्षय होने से बचाना भी है. बहुत सुन्दर कोमल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. ऊर्जा मिलने लगी है!
    धूप अब खिलने लगी है!
    --
    गेयता से परिपूर्ण मनरंजक गीत!

    जवाब देंहटाएं
  7. ऊर्जा मिलने लगी है!
    धूप अब खिलने लगी है!
    --
    गेयता से परिपूर्ण मनरंजक गीत!

    जवाब देंहटाएं
  8. सूर्य का भी संक्रमण प्रारम्भ हो गया है।

    जवाब देंहटाएं
  9. आदरणीय चाचाश्री डॉ.रूपचन्द्र जी शास्त्री "मयंक"
    प्रणाम !
    प्रथमतः आपकी पुस्तकों के प्रकाशन पर हार्दिक बधाइयां !


    फिर …
    आपके वहां आयोजित साहित्यिक-ब्लॉगर सम्मेलन के सफल आयोजन की बधाइयां !

    और,

    धूप अब खिलने लगी है
    गीत की तो बात ही क्या ! पूरा गीत लय में है । सच कहूं तो बसंत का आभास होने लगा …

    आपके शब्द कभी किसी वाह वाह की मुहर के मोहताज नहीं होते ।
    मैं तो नए छंदसाधकों से कहूंगा - किसी को प्रेरणा लेनी है तो आपके गीतों से ले ।

    >~*~ हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !~*~
    शुभकामनाओं सहित
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

    जवाब देंहटाएं
  10. ऊर्जा मिलने लगी है!
    धूप अब खिलने लगी है!

    बहुत ही सुन्दर.

    जवाब देंहटाएं
  11. सच मे बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति।
    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (17/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत ऊर्जा प्रदान करती रचना |बधाई नई पुस्तकों के लिये |
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर और प्यारा गीत है.

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर शब्द चित्र..आभार

    जवाब देंहटाएं

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