"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

शनिवार, 9 जुलाई 2011

"वर्षा आई" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



शीतल पवन चली सुखदायी।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।
भीग रहे हैं पेड़ों के तन,
भीग रहे हैं आँगन उपवन,
हरियाली सबके मन भाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।

मेंढक टर्र-टर्र चिल्लाते,
झींगुर मस्ती में हैं गाते,
आमों की बहार ले आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।

आसमान में बिजली कड़की,
डर से सहमें लडका-लड़की,
बन्दर जी की शामत आई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।

कहीं छाँव है, कहीं धूप है,
इन्द्रधनुष कितना अनूप है,
धरती ने है प्यास बुझाई।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।

कल विद्यालय भी जाना है,
होम-वर्क भी जँचवाना है,
मुन्नी कॉपी लेकर आयी।
रिम-झिम, रिम-झिम वर्षा आई।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. आप का बलाँग मूझे पढ कर आच्चछा लगा , मैं बी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    मै नइ हु आप सब का सपोट chheya
    joint my follower

    जवाब देंहटाएं
  2. आप बहुत सुन्दर लिखते हैं सर :)

    जवाब देंहटाएं
  3. कहीं छाँह है कहीं धूप है
    इन्द्र धनुष कितना अनूप है

    वाह शास्त्री जी, क्या वर्णन किया है प्रकृति का| बहुत सुंदर|

    http://thalebaithe.blogspot.com/2011/07/blog-post.html

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही अच्छी प्रस्तुति ||
    बधाई ||

    जवाब देंहटाएं
  5. इसे कहते है, लोहा गर्म है मार दो हथोडा,
    बरसात का मौसम है, सब कुछ समेट लिया है।

    जवाब देंहटाएं
  6. बालगीत मे आपका सानी नही सुंदर और मनमोहक

    जवाब देंहटाएं
  7. लो बरसात का आनन्द और खाइए चाय और पकोड़ी , क्या फर्क पड़ता है गर मंहगाई बढ़ जाये थोड़ी
    अच्छा लगा बाल गीत .....

    जवाब देंहटाएं
  8. प्रकृति गीत बढ़िया बना है... कई बार पढ़ गया ....

    जवाब देंहटाएं
  9. वर्षा का सुन्दर चित्रण .. अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  10. बहुत प्यारा बाल गीत।
    चित्र ने पोस्ट को वर्षामय बना दिया, और वर्षा की बूंदों की तरह शब्द टपक रहे थे और हम गीत की रसधार में भींग रहे थे ... अहाहा आनंद आ गया।

    जवाब देंहटाएं
  11. कहीं छाँह है कहीं धूप है
    इन्द्र धनुष कितना अनूप है

    Sunder ..Pyari si Rachna

    जवाब देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर लय ताल भाव लिए वर्षा गीत .बाल मान भाये ,सावन आये ...

    जवाब देंहटाएं
  13. वाकई बड़ी जोर की वर्षा आई तन-मन सारा भीग गया

    जवाब देंहटाएं
  14. छमा -छम बारिश हो रही हैं हमारे यहाँ ...उसपर आपका गीत क्या कहने ....पकोड़े खाओ और मस्त वर्षा का आन्नद लो ..

    जवाब देंहटाएं
  15. हमको भी ये खूब लुभायी,
    रिमझिम रिमझिम वर्षा आयी।

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails