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शुक्रवार, 25 दिसंबर 2009

"कष्ट-क्लेश का होगा नाश।" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


कल तक तो तुम आस-पास थे,
कल को हो जाओगे खास।
कल तक तो तुम वर्तमान थे,
कल बन जाओगे इतिहास।।

जब तुम आये नये-नये थे,
हमने अभिनव गान किये थे,
तुम से आशाएँ जोड़ीं थीं,
अभिनन्दन शुभगान किये थे,
आज विदाई की वेला में,
मेरा मन है बहुत उदास।

कल तक तो तुम वर्तमान थे,
कल बन जाओगे इतिहास।।

आना है तो जाना होगा,
कुदरत का कानून अटल है,
निर्मल-नीर बहाना होगा,
जब तक सरिताओं में जल है,
विदा शब्द के उच्चारण से,
सुमन हुआ है बिना सुवास।

कल तक तो तुम वर्तमान थे,
कल बन जाओगे इतिहास।।

आशा है नव-वर्ष ढेर सी,
जीवन में खुशियाँ लायेगा,
मरुथल ओर वीरानें मे भी,
फिर से उपवन मुस्कायेगा.
सुख का बादल बरसायेगा,
कष्ट-क्लेश का होगा नाश।

कल तक तो तुम वर्तमान थे,
कल बन जाओगे इतिहास।।

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत उम्दा सोच एवं रचना!!

    जवाब देंहटाएं
  2. सत्य कहा शाश्त्री जी. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर! नव वर्ष की शुभ-कामनाएं!

    जवाब देंहटाएं
  4. शास्त्री जी बहुत सुंदर रचना

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना. नए वर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
  6. क़ाबिले-तारीफ़ है। आपको नए साल की मुबारकबाद।

    जवाब देंहटाएं
  7. सुन्दर !

    बीते साल 2009 के बहाने फानी दुनिया की सच्चाई बयान आप जैसा कोई विद्वान् ही कर सकता है /

    बड़ी संवेदनशील कविता रची है आपने बधाई ! साथ ही नए साल की अग्रिम शुभकामना भी कबूल करे / थैंक्स/

    जवाब देंहटाएं
  8. नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा मंगलवार (18-05-2021 ) को 'कुदरत का कानून अटल है' (चर्चा अंक 4069) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है।

    चर्चामंच पर आपकी रचना का लिंक विस्तारिक पाठक वर्ग तक पहुँचाने के उद्देश्य से सम्मिलित किया गया है ताकि साहित्य रसिक पाठकों को अनेक विकल्प मिल सकें तथा साहित्य-सृजन के विभिन्न आयामों से वे सूचित हो सकें।

    यदि हमारे द्वारा किए गए इस प्रयास से आपको कोई आपत्ति है तो कृपया संबंधित प्रस्तुति के अंक में अपनी टिप्पणी के ज़रिये या हमारे ब्लॉग पर प्रदर्शित संपर्क फ़ॉर्म के माध्यम से हमें सूचित कीजिएगा ताकि आपकी रचना का लिंक प्रस्तुति से विलोपित किया जा सके।

    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।

    #रवीन्द्र_सिंह_यादव

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सुंदर और दार्शनिक रचना, आदरणीय 🙏

    जवाब देंहटाएं
  10. फिर से उपवन महके ! आशा का संचार करता सुन्दर गीत !

    जवाब देंहटाएं

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