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भारत माँ का कीर्तन-भजन होना चाहिए।
देश की सीमाओँ को बचाने के लिए तो आज,
तन-मन प्राण का हवन होना चाहिए।
शासकों को सीधी चाल चलने की जरूरत है,
तुष्टिकरण नीति का दमन होना चाहिए।
ईंट का जवाब अब देना होगा पत्थरों से,
बैरियों को कब्र में दफन होना चाहिए।
कोठी-बंगलों में ऐश बन्द होनी चाहिए,
सबके लिए मामूली भवन होना चाहिए।
रत्न-भूषण और श्री चाटुकारिता के चिह्न से,
मुक्त अपना प्यारा ये चमन होना चाहिए।
उग्रवादियों को सजा फाँसी की मिले तुरन्त,
अपने प्यारे देश में अमन होना चाहिए।
नेताओं की लाश को न झण्डे लपेटा जाये,
शहीदों का तिरंगा कफन होना चाहिए।
आजादी की जंग में जिन्होंने बलिदान दिया,
उन देशभक्तों का नमन होना चाहिए
जाति-धर्म, भाषा और भूषा की न होड़ लगे,
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।
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आजादी की जंग में जिन्होंने बलिदान दिया,
जवाब देंहटाएंउन देशभक्तों का नमन होना चाहिए
जाति-धर्म, भाषा और भूषा न होड़ लगे,
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।
बहुत सुंदर प्रस्तुति ,,,
RECENT POST : जिन्दगी.
घण्टे-घड़ियाल, ताल-खड़ताल लेके अब,
जवाब देंहटाएंभारत माँ का कीर्तन-भजन होना चाहिए।
देश की सीमाओँ को बचाने के लिए तो आज,
तन-मन प्राण का हवन होना चाहिए।
अति सुन्दर !
आजादी की जंग में जिन्होंने बलिदान दिया,
जवाब देंहटाएंउन देशभक्तों का नमन होना चाहिए
जाति-धर्म, भाषा और भूषा न होड़ लगे,
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।--
सही और सटीक सीख
latest post नेता उवाच !!!
latest post नेताजी सुनिए !!!
"आजादी की जंग में जिन्होंने बलिदान दिया,
जवाब देंहटाएंउन देशभक्तों का नमन होना चाहिए
जाति-धर्म, भाषा और भूषा न होड़ लगे,
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।"....
देश-प्रेम से ओत-प्रोत .....वाह
बहुत सुंदर रचना !
जवाब देंहटाएंबहुत जोशीली और सार्थक यथार्थ की प्रस्तुति करने वाली घनाक्षरियाँ हैं मित्र !
जवाब देंहटाएंबहुत ओजस्वी.
जवाब देंहटाएंरामराम.
very inspiring.
जवाब देंहटाएंजय जय जय जय देश हमारे,
जवाब देंहटाएंसदा पल्लवित, सबके प्यारे।
प्रेरणात्मक कविता के लिए आभार !
जवाब देंहटाएं
जवाब देंहटाएं♥ वंदे मातरम् ! ♥
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नेताओं की लाश को न झण्डे में लपेटा जाये,
शहीदों का तिरंगा कफन होना चाहिए।
तुष्टिकरण नीति का दमन होना चाहिए।
सबसे पहले अपना वतन होना चाहिए।
लाजवाब ! अत्युत्तम !
आदरणीय शास्त्री जी
सुंदर छंद में सबके मन की बातें कही है आपने
नमन आपको !
हार्दिक बधाई
...शुभकामनाओं सहित
-राजेन्द्र स्वर्णकार