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आ गईं बहारें मधुवन में,
गुलशन में कलियाँ चहक उठीं,
पुष्पित बगिया भी महक उठी,
अनुरक्त हुआ मन का आँगन।
आया बसन्त, आया बसन्त।१।
चिड़ियों ने छाया नववितान,
यौवन ने ली है अँगड़ाई,
सूखी शाखा भी गदराई,
बौराये आम, नीम-जामुन।
आया बसन्त, आया बसन्त।२।
हिम हटा रहीं पर्वतमाला,
तम घटा रही रवि की ज्वाला,
गूँजे हर-हर, बम-बम के स्वर,
दस्तक देता होली का ज्वर,
सुखदायी बहने लगा पवन।
आया बसन्त, आया बसन्त।३।
भँवरे रस पीते हुए मिले,
मधुमक्खी शहद समेट रही,
सुन्दर तितली भर पेट रही,
निखरा-निखरा है नील गगन।
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बसंत के आगमन पे बहुत ही सुन्दर रचना .... खिता हुआ बसंत असा ही तो होता है ....
जवाब देंहटाएंबसंत के आगमन पर सुंदर रचना.
जवाब देंहटाएंवसंत का माधुर्य मन में छा गया .
जवाब देंहटाएंबसंतागमन पर बहुत सुन्दर रचना
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