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शनिवार, 26 जनवरी 2019

दोहे "लोग रहे हैं खीझ" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

 
अपना भारतवर्ष हैगाँधी जी का देश।
सत्य-अहिंसा का यहाँबना हुआ परिवेश।।
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मँहगाई से कर लियाशासन ने अब मेल।
झूठे सपने दिखाकरखेल रहे वो खेल।।
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जब से आयी देश में, बहुमत की सरकार।
महँगाई के सामने, जनता है लाचार।
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खेतीहर पर हो रहाअब तो अत्याचार।
मनमानी पर है तुलीचुनी हुई सरकार।।
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आज आदमी मल रहाअपने खाली अपने हाथ।
आगामी मतदान मेंनहीं मिलेगा साथ।।
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भाषण लच्छेदार थे, पर थोथे थे बोल।
अच्छे दिन के स्वप्न तोआज हो गये गोल।।
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आम जरूरत की हुईं, मँहगी सारी चीज।
देख सुशासन को यहाँ, लोग रहे हैं खीझ।।

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