-- कीचड़ से बरसात में, सड़के हैं लवरेज। कोशिश करके नीड़ को, निर्धन रहे सहेज।। -- जगह-जगह होने लगा, पानी का ठहराव। नदियाँ भी तटबन्ध का, करने लगीं कटाव।। -- नक्शा बदला नगर का, बिगड़ गया भूगोल। पहली बारिश में खुली, इन्तजाम की पोल।। -- उगने लगी जमीन पर, हरी-हरी अब घास। बारिश से पूरी हुई, पशुओं की भी आस।। -- सात दिनों में गयी बदल, नदियों की तकदीर। बारिश ने है भर दिया, तालाबों में नीर।। -- इन्द्रदेवता देश में, बाँट रहे उपहार। बहा ले गयी गन्दगी, सब नदियों की धार।। -- लालच में पड़कर कभी, खोना मत किरदार। पहरेदारों देश के, बनना पानीदार।। -- |
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