"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

शुक्रवार, 21 अगस्त 2015

ग़ज़ल "सुहाना प्यार का साया" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नहीं किस्मत में फूलों की, सुहाना प्यार का साया
मिला मौका जिसे जब भी,  मसलने लग गया काया

कली ने मुस्करा के जब, प्रणय के गीत को गाया
अधर को चूमने उसके, भ्रमर उड़कर चला आया

अज़ब हैं खेल दुनिया के, अजब दस्तूर हैं उसके
वहाँ करते हैं गद्दारी, जहाँ का रिज़क है खाया

सभी को बाँटते खुशियाँ, मगर तकदीर खोटी है
सम्भाला होश है जबसे, मिली काँटों की है छाया

सभी हैं यार मतलब के. बड़ी ख़ुदगर्ज़ दुनिया है
दरिन्दों को गुलिस्ताँ में, रुपहला “रूप” है भाया

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails