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रविवार, 24 अक्तूबर 2010

“… ..मंजिल पूरी!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

gutarगूगल टॉक पर
चैट!
मन के आकाश पर
उड़ रहा है
जैट!!
खूब मिल रहा है
कच्चा माल!
दिल और दिमाग पर
छा रहे हैं खयाल!!
कपड़े की गाँठ में बँधे हैं
थान के थान!
गिरह खोलने को
नही मिल रहा है
कोई स्थान!!
भावों की स्याही
और
दिल की कलम!
ग़ज़ल में
रचे बसे हैं
आप और हम!!
मगर आड़े आ रहा है
अहम!
क्योंकि
दोनों में से
कोई भी नहीं है
कम!!
आओ मिटाएँ
आपस की दूरी!
तभी तो होगी 
मंजिल पूरी!!

21 टिप्‍पणियां:

  1. मायावी अन्तर्जाल के संबन्ध मन न भर पायेंगे। बहुत सुन्दर कविता।

    जवाब देंहटाएं
  2. kaash ye aham naam ka shabd hi khatam ho jaye to adhikadhik samasaaye to yoonhi khatam ho jaayengee... bahut pyaaree rachna

    जवाब देंहटाएं
  3. वाह बेहद उम्दा प्रस्तुति………………गज़ब के भाव भर दिये हैं।

    आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (25/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत खुबसुरत कविता जी, धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. आज चैट पर दो कवितायें पढने को मिली.. एक वंदना जी की और एक आपकी.. दोनों के भाव अलग अलग.. जहाँ वंदना जी आधुनिक नारी के अहं को संतुष्ट कर रही हैं चैट के हथियार से.. आप दुरी मिटने की बात कर रहे हैं.. आपकी अकविता एक अच्छी कविता बन गई है..

    जवाब देंहटाएं
  6. बहुत बढ़िया ताज़गी से परिपूर्ण कविता!

    जवाब देंहटाएं
  7. आओ मिटाएं
    आपस की दूरी
    तभी तो होगी
    मंजिल पूरी।


    यथार्थ संदेश देती हुई पंक्तियां।

    जवाब देंहटाएं
  8. ्शानदार. बढ़िया... आज की पीढ़ी के सन्दर्भ में सटीक.

    जवाब देंहटाएं
  9. आज तो बहुत कुछ अलग है. आप और आपका अंदाज़ भा गया

    जवाब देंहटाएं
  10. जितनी प्रशंसा की जाये कम है
    मगर इस बात बहुत ही ग़म है
    कि ये अभिनव कविता आपने लिखी...........
    मैंने क्यों नहीं........हा हा हा

    जवाब देंहटाएं
  11. vaah .. chat par bhi kavita... bhai aik kavi to har stithi par kavita likh dalta hai.. bahut khoob likha...

    जवाब देंहटाएं
  12. इन आभासी रिश्तों की दुनिया के विषय में सुंदर सन्देश .....

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर अभिव्यति |बधाई
    मुझे नज्म और गजल में अंतर स्पष्ट करवाने के लिए बहुत बहुत आभारी हूं | आपके कमेन्ट के बाद अपने
    गुरूजी से भी मैने दौनों में फर्क जाना |एक बार
    फिर से बहुत बहुत आभार |
    आशा

    जवाब देंहटाएं
  14. सुन्दर कविता ,सटीक व्यंग्य...वाह !!!!

    खूब खबर ली आपने...

    जवाब देंहटाएं

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