"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 28 अक्तूबर 2010

“सभ्यताओं का अन्तर!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

किसी ज़माने में
गाली था
इंसान को
जानवर कहना
--
और अब
जानवरों को गाली देना है
इंसान को जानवर कहना
लेकिन
पशुओं की नियति है
चुपचाप सब कुछ सहना 
--
क्योंकि अब
जानवर सभ्य है
और आदमी
असभ्य है
नियम से रहता है
कुछ नही कहता है
--
यही तो अन्तर है
सभ्यताओं का!

18 टिप्‍पणियां:

  1. थोड़े से स्‍वार्थ के लिए जानवरों पर अत्‍याचार किया जाता है और उनके परिणामों के बारे में कोई नहीं सोचता। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
    राजभाषा हिन्दी पर - ये अंधेरों में लिखे हैं गीत!
    मनोज पर -आंच – समीक्षा डॉ. जे. पी. तिवारी की कविता ‘तन सावित्री मन नचिकेता’

    जवाब देंहटाएं
  2. क्योंकि अब
    जानवर सभ्य है
    और आदमी
    असभ्य है
    नियम से रहता है
    कुछ नही कहता है
    --
    यही तो अन्तर है
    सभ्यताओं का

    क्या बात है सच कहा है ..हम फिर से जा रहे हैं पाषाण काल में.

    जवाब देंहटाएं
  3. यही तो अन्तर है
    सभ्यताओं का !क्या बात है, बधाई!

    जवाब देंहटाएं
  4. बिल्कुल यही अन्तर है... जानवर को आदमी कहने से शायद वह नाराज हो जायेगा.

    जवाब देंहटाएं
  5. क्योंकि अब
    जानवर सभ्य है
    और आदमी
    असभ्य है
    -----------------
    बहुत सुन्दरता से सभ्यता का अंतर बता दिया आपने.....ऐसा ही है.....

    जवाब देंहटाएं
  6. सच बयान करती रचना...
    हद तो ये है कि हम खुश हैं..
    कि हम सभ्य हो गए हैं.

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर कवित. नये अन्दाज़ में लिखी हुई.

    जवाब देंहटाएं
  8. क्योंकि अब
    जानवर सभ्य है
    और आदमी
    असभ्य है
    u r right. achchi kavita

    जवाब देंहटाएं
  9. बिल्कुल यही अन्तर है... बहुत सुन्दर कवित!

    जवाब देंहटाएं
  10. Sorry for my bad english. Thank you so much for your good post. Your post helped me in my college assignment, If you can provide me more details please email me.

    जवाब देंहटाएं
  11. बेनामी ने आपकी पोस्ट " “सभ्यताओं का अन्तर!” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयं... " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    Sorry for my bad english. Thank you so much for your good post. Your post helped me in my college assignment, If you can provide me more details please email me.

    --
    बेनामी जी!
    यह भी तो बता दीजिए कि मैं मेल कहाँ करूँ?
    आप तो स्वयं ही बेनामी के रूप में सामने आये हैं!

    जवाब देंहटाएं
  12. नियम से रहता है
    कुछ नही कहता है

    Shukriya share karne ke liya

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails