आज हम आपको पड़ोसी देश
नेपाल की सैर पर ले चलते हैं।
नेपाल का एक बहुत ही
खूबसूरत शहर है महेन्द्र नगर।
यहाँ पहुँचने
के लिए आपको पहले बनबसा जाना पड़ेगा। यह वही बनबसा
है जहाँ मैं सन् 1975 से 1985 तक 12 साल तक रहा था।
पहले यह नैनीताल जिले में हुआ करता था मगर नैनीताल के मैदानी भाग को अलग करके एक
नया जिला ऊधमसिंहनगर के नाम से बनाया गया तो बनबसा ऊधमसिंह नगर में चला गया गया।
कालान्तर में पिथौरागढ़ जिले को दो भागों में विभक्त करके में एक नया जिला
चम्पावत के नाम से बनाया गया और ऊधमसिंहनगर जिले का बनबसा क्षेत्र चम्पावत
में चला गया। मैंने बनबसा में ही कैनाल रोड मीनाबाजार में अपना सुरुचिपूर्ण भवन भी बनाया था और
यहीं पर मेरे छोटे पुत्र विनीत का जन्म हुआ था। उस समय बनबसा में लकड़ी के झाले
(झोंपड़ियाँ) ही अधिक थीं। यहाँ तक मुझे याद है मेरा यह पक्का आवास गिनती के 10 मकानों में से एक था।
बनबसा में वैसे
तो आपको कुछ खास नही लगेगा पर जैसे ही आप नेपाल की ओर बढ़ेंगे। यहाँ के कुदरती
नजारे आपका मन जरूर मोह लेंगे।
यदि आप अपने
वाहन/कार से आरहे हैं तो आपको सुबह 6 से 8, दोपहर 1 से 2 तथा शाम का 5 से 7 बजे तक बनबसा शारदा बैराज का गेट खुला मिलेगा।
आप आराम से इन
समयों में वाहन से शारदा नदी का पुल पार कर नेपाल में प्रवेश कर जायेंगे। इस
बैराज मं 34 गेट बने हैं। जिसका नजारा बड़ा ही मनोहारी प्रतीत
होता है।
इस बैराज के
पहले छोर पर शारदा मेन कैनाल है। जो भारत में बहती है तथा दूसरे किनारे पर एक
नहर नेपाल के लिए निकाली गयी है।
पुल पार करते
ही आपको भारत की सीमा पर बने कस्टम व इमीग्रेशन की चेक पोस्ट पर अपनी एन्ट्री
करानी होगी।
डेढ़ किमी आगे
जाने पर आपको नेपाल की सीमा पर बनी गड्डा-चौकी से दो -चार होना पड़ेगा। यानि वहाँ
भी एन्ट्री करानी होगी। इसके लिए आपके पास वाहन के कागजात और ड्राइविंग लाइसेन्स
का होना बहुत जरूरी है।
यदि आप अपने
वाहन से नही आ रहे हैं तो आपको रिक्शा या घोड़ा-ताँगा का सहारा लेना पड़ेगा। जिस
पर सफर करने का अपना अलग ही आनन्द है। सारे नजारे आप बहुत अच्छी तरह से देखते
हुए चले जायेंगे।
बनबसा से
महेन्द्र नगर की दूरी 8-9 किमी की है।
लगभग 1 घण्टे का समय रिक्शा वाले या तांगे वाले वहाँ तक
पहुँचने में लगाते हैं।
महेन्द्र नगर
जाने पर आपको यहाँ के बाजार में विदशी सामानों से पटी हुई दूकाने मिलेंगी। आप
आराम से शापिंग कर सकते हैं परन्तु बहुत ही सीमित मात्रा में।
यहाँ के
रेस्टोरेन्टों में और ढाबों में आपको चाय-पानी और मीट के अलावा शराब भी खुले रूप
से बिकती हुई मिलेंगी।
महेन्द्र नगर से 1 किमी दूर
आपको सिद्धबाबा का मन्दिर भी मिलेगा।
आप यहाँ आकर प्रसाद चढ़ाये
और सच्चे मन से मनौती माँग कर
अपने घर को लौटें।
सिद्धबाबा आपकी हर मनौती को पूर्ण करेंगे।
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