-- उदित रोशनी जब हुई, भरमाया मन मोर। पागल मधुकर ने किया, गुंजन का तब
शोर।1। -- राहों में चूना लगा, फिर बरसी बरसात। तभी समझ में आ गयी, छल-बल की सौगात।2। -- मधुकर की चालाकियाँ, चला किरण का वार। फँसा वाक चातुर्य में, रूप हुआ
लाचार।3। -- नस-नस में धोखा भरा, मधुकर ऐसी चीज। बोल-चाल की थी नहीं, उसको जरा तमीज।4। -- काशी में साहित्य की, हुई करारी हार। महाग्रन्थ के नाम पर, ठगने का व्यापार।5। -- केवल श्लाघा में हुआ, षटपद-मधुकर
व्यस्त। दिन में ही लगता मुझे, ज्ञान-भास्कर
अस्त।6। -- ऐसे रचनाकार से, बचकर रहना मित्र। पल-पल में है बदलता, जिनका चाल-चरित्र।7। -- |
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