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गुरुवार, 3 मार्च 2011

"हमारा भारत देश महान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


 
पनप रहे हैं आज चमन में घूसखोर-शैतान।
हमारा भारत देश महान।
हमारा भारत देश महान।

अस्मत के रक्षक बन बैठे कामी और व्यभिचारी,
आज सियासत के फकीर बन बैठे सत्ताधारी,
रिश्वत की जंजीरों ने जकड़ा है हिन्दुस्तान।
हमारा भारत देश महान।
हमारा भारत देश महान।

राम राज को चला रहे हैं, रावण, कंस-दुशासन,
जिनके जलते पुतले, वो बैठे हैं घेरे आसन,
भोली-भाली जनता होती परेशान हैरान।
हमारा भारत देश महान।
हमारा भारत देश महान।

जिनका कुछ भी दोष नहीं है, वो हैं कारागारों में,
साज़िश रचने वाले बैठे, महलों और आगारों में,
ऊँचे दामों में बिकता है, न्याय और ईमान। 
हमारा भारत देश महान।
हमारा भारत देश महान।

निर्धनता की चक्की में, निर्धन पिसते जाते है,
ढोंगी भगत मन्दिरों में, चन्दन घिसते जाते हैं,
इन्सानों की बस्ती में, बस गये आज हैवान।
हमारा भारत देश महान।
हमारा भारत देश महान।

13 टिप्‍पणियां:

  1. इस भ्रष्टाचार पर विजय पाकर देश महान बनेगा।

    जवाब देंहटाएं
  2. ढोंगी भगत मन्दिरों में, चन्दन घिसते जाते हैं,
    इन्सानों की बस्ती में, बस गये आज हैवान।
    हमारा भारत देश महान।
    yahi he hakikat
    isko hi mante shaan
    humara Bharat mahan
    sunder rachna
    aabhar

    जवाब देंहटाएं
  3. हैं लाखों समस्याएं फिर अपना देश महान .
    प्रभावी प्रस्तुति.

    जवाब देंहटाएं
  4. अत्यंत प्रभावशाली रचना, शुभकामनाएं.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  5. सब कुछ नकारत्मक हो ऐसा भी नहीं है .अनेक महापुरुषों ने पहले भी और आज भी भारत वर्ष को महान बनाया है .जब 'प्रेय ' को छोड़ 'श्रेय 'का
    मार्ग अपनाएंगे तो निश्चितरूप से भारत महान होगा ही .मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा'पर आपका हार्दिक स्वागत है .

    जवाब देंहटाएं
  6. sau me se nabbay baiman phir bhi mera desh mahaan. vah dr. sahab sachaai ka kya khoob aaina dikhaya hai aapnay congratulations

    जवाब देंहटाएं
  7. सबसे गंभीर समस्या पर बेहद प्रभावशाली रचना।

    जवाब देंहटाएं
  8. सुन्दर व्यंग.करार प्रहार मौजूदा हालात पर.

    जवाब देंहटाएं
  9. बहुत सटीक और करारी चोट आज की व्यवस्था पर...आभार

    जवाब देंहटाएं
  10. इस समाज की सूरत दिखाते दर्पण रुपी कविता के लिए आपका आभार ...सुन्दर रचना...

    जवाब देंहटाएं
  11. भ्रष्टाचार पर बहुत अच्छी कविता....
    सच्चाई को वयां करती हुई ...

    जवाब देंहटाएं
  12. मजा आया आपकी कलम से यथार्थ को इक़ बार फिर से पढने में. शानदार!
    --
    व्यस्त हूँ इन दिनों-विजिट करें

    जवाब देंहटाएं

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