आज सरल शब्दों में
बाल साहित्य का अभाव होता जा रहा है। लेकिन मैंने माँ की कृपा से सभी बालसुलभ विषयों पर बाल साहित्य में अपनी लेखनी चलायी है। यद्यपि सीधे-सादे शब्दों में कविता रचना इतना आसान नहीं होता है, जितना कि उनको पढ़ना सरल होता है। परन्तु आजकल ब्लॉग और फेसबुक दोनों ही स्थानों पर बालसाहित्य की उपेक्षा होती देख कर मन में मलाल जरूर होता है। -- हिन्दी व्यञ्जनावली-तवर्ग
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"त"
"त" से तकली और तलवार!
बच्चों
को तख्ती से प्यार!
तरु
का अर्थ पेड़ होता है,
तरुवर
जीवन का आधार!!
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"थ"
"थ" से थन, थरमस
बन जाता!
थम
से जन जीवन थम जाता!
थाम
रहा थम जगत-नियन्ता,
सबका
रक्षक एक विधाता!!
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"द"
द
से दवा-दवात-दया है!
दंगल
में बलवान नया है!
कभी
नही वो वापिस आया,
जो
दुनिया से चला गया है!!
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"ध"
"ध" से धरा-धनुष होता है!
गुण
से धनी मनुष होता है!
जिसमें
मानवता बसती हो,
वही
महान-पुरुष होता है!!
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"न"
"न" से नल-नदिया बन जाता!
नल
का पानी से है नाता!
नल
को मत बेकार चलाओ,
जल
ही है जीवन का दाता!!
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बचपन भी कहीं सो सा या खो सा गया नहीं लगता है कभी आपको :)
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना।
सुंदर सार्थक संदेशपरक बाल गीत साथ में कायदा (हिंदी )वर्णमाला /तख्ती/अबॉकस।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर सार्थक प्रयास।।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर ।
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर सरल प्रवाह है इस प्रस्तुति का. सार्थक रचना
जवाब देंहटाएंसार्थक बाल रचना... बधाई आपको.
जवाब देंहटाएंSarthak sunder rachna...
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