मंगलवार, 8 मार्च 2016

"आठ मार्च-महिला दिवस" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

"महिला दिवस"
कहने को महिला दिवसमना रहे सब आज।
मगर नारियों की यहाँ, रोज लुट रही लाज।१। 

कुछ महिलाएँ हैं अभीदुनिया से अनजान।
घर के बाहर है नहीं, जिनकी कुछ पहचान।२।

परिणय के पश्चात हीमिल जाता उपनाम।
ढोना इस उपनाम कोअब तो उम्र तमाम।३।

नारी नर की खान हैसब देते सन्देश।
सिर्फ सुनाने के लिएहोते हैं उपदेश।४।

युगों-युगों से नारि काहोता मर्दन मान।
राम रम रहे जगत मेंसीता है गुमनाम।५।

जागो अब तो नारियोंतुम हो दुर्गा रूप।
तुम्हें बदलना चाहिएदुनिया के अनुरूप।६।

आज समय की माँग हैदो परिवेश सुधार।
कर्तव्यों के साथ मेंछीनों अब अधिकार।७। 

शक्ति स्वरूपा हो तुम्हींमाता का अवतार।
तुमको ही तो जगत काकरना है उद्धार।८।

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