"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

फ़ॉलोअर

रविवार, 11 अगस्त 2019

दोहे "अब मिट गया वजूद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वंशवाद पर है टिकी, काँगरेस की नाव।
तालाबों की पंक का, अब उसमें ठहराव।।
--
गिने-चुने हैं सांसद, घुटी-घुटी आवाज।
पलक झपकते शीश से, छिना राज का ताज।।  
--
काँगरेस का देश में, अब मिट गया वजूद।
कद-काठी के हैं नहीं, नेता भी मौजूद।।
--
बनने की अध्यक्ष की, जिनको नहीं तमीज।
देशभक्ति का गले में, लटकाया ताबीज।।
--
बोल-चाल में भी नहीं, कोई शिष्टाचार।
काँगरेस के खुल रहे, अब तो भ्रष्टाचार।।
--
आज उजागर हो रहे, नेहरू जी के नृत्य।
काश्मीर के लिए थे, उनके काले कृत्य।।
--
क्यों सौंपा था पाक को, खुद आधा कशमीर।
बैरी के है हाथ में, क्यों अपनी जागीर।।
--
जनता के मन में उठे, कितने आज सवाल।
काँगरेस ने मुफ्त में, सिर पर लिया बबाल।।
 --

2 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (12-08-2019) को "बने ये दुनिया सबसे प्यारी " (चर्चा अंक- 3425) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails