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शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

दोहे "योगिराज का जन्मदिन" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

योगिराज का जन्मदिन, मना रहा संसार।
हे मनमोहन देश में, फिर से लो अवतार।।

सुनने को आतुर सभी, बंसी की झंकार।
मोहन आओ धरा पर, भारत रहा पुकार।।

श्री कृष्ण भगवान ने, दूर किया अज्ञान।
युद्ध भूमि में पार्थ को, दिया अनोखा ज्ञान।।

भारत के वर्चस्व का, जिससे हो आभास।
लगता वो ही ग्रन्थ तो, हमको सबसे खास।।

वेद-पुराण-कुरान का, गीता में है सार।
भगवतगीता पाठ से, होते दूर विकार।

दो माताओं का मिले, जिसको प्यार दुलार।
वो ही करता जगत में, दुष्टों का संहार।।

दुर्योधन जब हो गया, सत्ता मद में चूर।
तब मनमोहनश्याम ने, किया दर्प को दूर।।

7 टिप्‍पणियां:


  1. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (24-08-2019) को "बंसी की झंकार" (चर्चा अंक- 3437) पर भी होगी।

    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित है
    ….
    अनीता सैनी

    जवाब देंहटाएं
  2. बेहतरीन सुन्दर प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  3. लाजवाब दोहे....
    भारत के वर्चस्व का, जिससे हो आभास।
    लगता वो ही ग्रन्थ तो, हमको सबसे खास।।
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति
    कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

    जवाब देंहटाएं
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