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मंगलवार, 17 अगस्त 2021

गीत "माँ की ममता के सिवा, कुछ भी नहीं असली है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

रात-दिन आज भी आभास मुझे होता है,

मेरी माँ मेरे सदा आस-पास रहती है।

मुसीबतों से कभी हारना नहीं बेटा,

माँ सदा मुझसे यही कहती है।।

--

जिन्दगी धूप-छाँव बदली है,

आज दुख और सुख भी नकली है,

माँ की ममता के सिवा,

कुछ भी नहीं असली है,

काल बदले भले ही युग बदले,

एक माँ है जो पीर सहती है।

मुसीबतों से कभी हारना नहीं बेटा,

माँ सदा मुझसे यही कहती है।।

--

सोच जिसकी भली सी होती है,

वो ही दुनिया में सन्त होता है,

थाह जिसकी नहीं मिली अब तक,

आसमाँ तो अनन्त होता है,

माँ की ममता की धार धरती पर

गंगा-यमुना की तरह बहती है।

मुसीबतों से कभी हारना नहीं बेटा,

माँ सदा मुझसे यही कहती है।।

11 टिप्‍पणियां:

  1. माँ की अनंत अजस्त्र ममता को परिभाषित करती बहुत ही सुन्दर रचना शास्त्री जी ! सच है माँ की तरह संतान से नि:स्वार्थ प्रेम और कोई नहीं कर सकता !

    जवाब देंहटाएं
  2. जिन्दगी धूप-छाँव बदली है,

    आज दुख और सुख भी नकली है,

    माँ की ममता के सिवा,

    कुछ भी नहीं असली है,

    उच्चारण पर रियलिटी बाइट्स से मुखरित हुई है माँ -सदा नीरा गंगा सी यादों में बनी रहती है माँ -

    मुसीबतों से कभी हारना नहीं बेटा,

    माँ सदा मुझसे यही कहती है।।यादों के दरीचे कुरेदती रचना शास्त्री जी रूपचंद मयंक की।

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 18-08-2021को चर्चा – 4,161 में दिया गया है।
    आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद सहित
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहद खूबसूरत रचना।माता जी को नमन 🙏🏻

    जवाब देंहटाएं
  5. मन में गहरे उतर जाने वाली रचना >>> माँ से साक्षात करा दिया आपके भावों ने

    जवाब देंहटाएं
  6. अलौकिक आनन्द की प्रतिमूर्ति माँ को शत् शत् नमन है । अति सुन्दर भाव सृजन ।

    जवाब देंहटाएं
  7. माँ की महत्ता का सार्थक वर्णन, माताजी को मेरा हार्दिक नमन।

    जवाब देंहटाएं
  8. बहुत सुंदर कोमल भाव, माँ की महिमा लेखनी पूरा करतो नहीं सकती पर आपने बहुत बहुत सुंदर परिभाषित किया है ।
    सादर।

    जवाब देंहटाएं
  9. माँ की ममता को परिभाषित करती बहुत सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं
  10. मन को छूते भाव...बेहतरीन 👌
    नमन।
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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