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रविवार, 29 अगस्त 2021

दोहे "फिर से लो अवतार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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बीत गया सावन सखेआया भादौ मास।

श्री कृष्ण जन्माष्टमीहै बिल्कुल अब पास।।

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी, मना रहा संसार।

हे मनमोहन देश में, फिर से लो अवतार।।

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राजनीति में हो गये, सारे कौवे हंस।

बाहर से गोपाल हैं, भीतर से हैं कंस।।

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दोपायो से आज हैंचौपाये भयभीत।

कैसे फिर मिल पायगादूध-दही नवनीत।।

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जब आयेंगे देश मेंकृष्णचन्द्र गोपाल।

आशा है गोवंश कातब सुधरेगा हाल।।

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जल थल में क्रीड़ा करेंबालक जब नन्दलाल।

नाचेंगी तब गोपियाँग्वाले देंगे ताल।।

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भारत के वर्चस्व का, जिससे हो आभास।

लगता वो ही ग्रन्थ तो, सबको सबसे खास।।

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फल की इच्छा मत करोकर्म करो निष्काम।

कण्टक वृक्ष खजूर परकभी न लगते आम।।

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वेद-पुराण-कुरान का, गीता में है सार।

भगवतगीता पाठ से, होते दूर विकार।

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दो माताओं का मिले, जिसको प्यार दुलार।

वो ही करता जगत में, दुष्टों का संहार।।

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6 टिप्‍पणियां:

  1. सभी के लिए ईश्वर से गुहार करती सार्थक रचना।बहुत शुभकामनाएँ आदरणीय शास्त्री जी।

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार(३०-०८-२०२१) को
    'जन्मे कन्हैया'(चर्चा अंक- ४१७२)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर रचना। सादर प्रणाम।

    जवाब देंहटाएं
  4. सबों की यही है आर्त्त पुकार कि कृष्ण लो अवतार । हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    जवाब देंहटाएं
  5. सामायिक दृश्य पर सटीक आह्वान करते दोहे।
    सुंदर भाव सृजन आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  6. श्री कृष्ण यदि आज अवतार लेंगे तो उन्हें एक कंस नहीं, बल्कि कई कंसों का वध करना पड़ेगा.

    जवाब देंहटाएं

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