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शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

"वासन्ती सा बिछा गलीचा" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

फूलों से है सजा बगीचा।
वासन्ती सा बिछा गलीचा।।
सूरज से टकटकी लगाते,
सुमन झूम कर हँसते गाते,
षट्पद, तितली, मधुमक्खी का,
अपनी ओर ध्यान है खींचा।
वासन्ती सा बिछा गलीचा।।
धानी धरती-नीला अम्बर,
पर्वत भी लगता है सुन्दर,
ऋतुओं के राजा ने आकर,
इन्द्र धनुष का रंग उलीचा।
वासन्ती सा बिछा गलीचा।। 

19 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी कविताओं ने बसन्त और मनभावन कर दिया है।

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी कविताओं से हमारे मन में भी वसंत जग चूका है.. सुन्दर कवितायें..

    जवाब देंहटाएं
  3. बसंत ऋतू का सुंदर वर्णन मनमोहक, बधाई

    जवाब देंहटाएं
  4. वसंत का वर्णन और मनोरम चित्र देखकर तो वसंतोत्सव के आगमन का संदेश मिल गया!!

    जवाब देंहटाएं
  5. बसंत के वर्णन की मनभावन कविता .....

    जवाब देंहटाएं
  6. फूलों से है सजा बगीचा।
    वासन्ती सा बिछा गलीचा।।
    bahut sunder likhe hain .

    जवाब देंहटाएं
  7. सूरज से टकटकी लगाते,
    सुमन झूम कर हँसते गाते,
    षट्पद, तितली, मधुमक्खी का,
    अपनी ओर ध्यान है खींचा।
    वासन्ती सा बिछा गलीचा।।
    Bahut sundar, shashtree ji

    जवाब देंहटाएं
  8. अब सभी ब्लागों का लेखा जोखा BLOG WORLD.COM पर आरम्भ हो
    चुका है । यदि आपका ब्लाग अभी तक नही जुङा । तो कृपया ब्लाग एड्रेस
    या URL और ब्लाग का नाम कमेट में पोस्ट करें ।
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    जवाब देंहटाएं
  9. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (7/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

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  10. मैं भी तैयार हूं स्वागत के लिए।

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत अच्छी रचना और तस्वीरें |बधाई |मुझे बहुत प्रसन्नता होती है आपके कमेंट्स पढ़ कर |प्रोत्साहन के लिए आभार |
    आशा

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  12. सुन्दर सी बासंती कविता

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत सुंदर..... लेकिन हमारे यहां तो अभी भी चारो ओर बर्फ़ ही बर्फ़ पडी हे, हमे मई तक इंतजार करना पडेगा जी

    जवाब देंहटाएं
  14. ऋतुओं के राजा ने आकर,
    इन्द्र धनुष का रंग उलीचा।
    वासन्ती सा बिछा गलीचा।।
    --
    बहुत सुंदर बिंबों का प्रयोग किया है!

    जवाब देंहटाएं
  15. वसंत की छटा देख स्तब्ध हैं .. वसंत की शुभकामनाओं के साथ ..

    जवाब देंहटाएं
  16. धानी धरती-नीला अम्बर,पर्वत भी लगता है सुन्दर,ऋतुओं के राजा ने आकर,इन्द्र धनुष का रंग उलीचा।वासन्ती सा बिछा गलीचा।।-

    मनमोहक विवरण -
    खूबसूरत चित्रण -
    छा गया बसंत मन पर .

    जवाब देंहटाएं

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