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मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

"प्रेम दिवस के कुछ वासन्ती दोहे" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



 "प्रेम दिवस के कुछ वासन्ती दोहे" 
two-parrots

 जैसे-जैसे आ रहा, प्रेमदिवस नज़दीक।
गोवा और मुम्बई के, लगे चहकने बीच।।

तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग। 
दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।। 

प्रेम दिवस में हो रहा, खेल बहुत संगीन। 
शब्द-ज़ाल में फँस गई, नाजुक उम्र हसीन।। 

नादानी और भूल से, कभी न करना प्यार। 
भली-भाँति सब सोचकर, ही करना इकरार।।

दिल-दिल से मिल जाये जब, समझो तभी बसन्त। 
हर मौसम ऋतुराज है, होता आदि न अन्त।। 
(चित्र गूगल से साभार)

14 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा शास्त्री जी आपने............हम नौजवानों को बहुत ही अच्छा सीख दे रहा है ये दोहा...वाह।

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  2. आपने भी वैलेंटाईन का माहौल बना दिया।

    जवाब देंहटाएं
  3. तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।
    दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।। nice

    जवाब देंहटाएं
  4. तोता-तोती पर चढ़ा, प्रेम-दिवस का रंग।
    दोनों ही सहला रहे, इक-दूजे के अंग।।


    वाह,वाह.. क्या बात सुन्दर शास्त्री जी !

    जवाब देंहटाएं
  5. सभी दोहे बसंती रंग मे रंगे हुये। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  6. 14 तक तो सप्ताह भर का बसंत-ज्वर चढ़ चुका होगा।

    जवाब देंहटाएं
  7. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (10/2/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
    http://charchamanch.uchcharan.com

    जवाब देंहटाएं
  8. आज की ये शिक्षा नौजवान पीडी के लिए आवश्यक है... बसंतपंचमी पर हार्दिक शुभकामनायें

    जवाब देंहटाएं
  9. तोता तोती अभी रंग में आगये हैं.:) बहुत सुंदर गीत.

    रामराम.

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह... बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

    जवाब देंहटाएं

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