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शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

"क्यों हाथों को छोड़ा?" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")


मित्रों! आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर
प्रतिस्पर्धा...... में यह चित्र देखा तो
कुछ तुकबन्दी बन गई है!
साभार
शब्दचित्रों के साथ!
यह चित्र प्रस्तुत है!
Friends18.com Orkut Scraps
देखो सरपट दौड़ रहा है, दो पैरों का घोड़ा।
घोटक राजा कुछ तो बोलो, क्यों हाथों को छोड़ा?।

इन्सानों की बस्ती में, सब वक्र चाल चलते हैं।
इनकी घुड़सालों में कितने, घोड़े-गर्दभ पलते हैं।।

चारा खाते हुए तुम्हारी, अकल गई क्यों मारी?
अपनी जात बदलकर, तुमने भूल करी है भारी।।

दो पग वालों के मन में, छल-कपट समाये रहते हैं।
जो इनके दिल में होता है, कभी न उसको कहते हैं।।

एक बार अपने निर्णय पर, सोच-विचार अवश्य करो।
उसके बाद मनुजता की, देहली पर अपने कदम धरो।।

चाल तुम्हारी मस्तानी, ये सहन नहीं कर पायेंगे।
घोटालों के भार-बोझ, तुम पर ही लादे जायेंगे।।

21 टिप्‍पणियां:

  1. bahut rochak.chitra ke maadhyam se achcha vyang prahaar kiya hai.

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत badhiyaa shastri ji , waise मैं soch रहा था कि jaise kampyutar की bhaasha में badee faail को zip करने का आप्शन hotaa है, waise ही agar jeev vigyaan के लिए भी koi zip का आप्शन निकल आये तो insaano को भी इसी घोड़े के tarah...... :)

    जवाब देंहटाएं
  3. sach aaj bina haathon ka ghoda hi sarpat bhagta hai..
    bahut badiya vyang..

    जवाब देंहटाएं
  4. गोदियालजी, नेक लोगों के नेक विचार होते हैं। पर यदि वही आप्शन "एंड-बैंड" हाथों में पड गया तो ???

    जवाब देंहटाएं
  5. मजेदार... दिलचस्‍प है ये दो पैरो वाला घोड़ा..

    जवाब देंहटाएं
  6. चाल तुम्हारी मस्तानी, ये सहन नहीं कर पायेंगे।
    घोटालों के भार-बोझ, तुम पर ही लादे जायेंगे।। बेहतरीन ग़ज़ल....

    जवाब देंहटाएं
  7. शास्त्री जी,..
    मेरे पोस्ट -प्रतिस्पर्धा-का चित्र पसंद आया,..आभार
    और आपने उस पर रोचक रचना लिख डाली,..
    सुंदर तुकबंदी के लिए बधाई,...

    जवाब देंहटाएं
  8. बढ़िया प्रस्तुति ||

    बधाई ||

    जवाब देंहटाएं
  9. व्यंग्यात्मक शैली मे रोचक प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  10. शास्त्री जी, नमन!
    बस और कुछ नहीं कहूंगा आज।
    आप तो कविता की पाठशाला है।

    जवाब देंहटाएं
  11. आपसे निवेदन है इस पोस्ट पर आकर
    अपनी राय अवश्य दें -
    http://cartoondhamaka.blogspot.com/2011/12/blog-post_420.html#links

    जवाब देंहटाएं
  12. पढना बहुत अच्छा लगा मजेदार रचना |

    आशा

    जवाब देंहटाएं
  13. चौपाये...बन रहने में ही भलाई है...वरना अपनी चाल भूल कर चालबाजियां करने लगेंगे...घोड़े भी...

    जवाब देंहटाएं

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