गया आम का मौसम,
प्लम बाजारों में अब छाया।
इनको देख-देख कर देखो,
सबका मन ललचाया।।
लाल-लाल हैं जितने पोलम,
वो हैं खट्टे-मीठे,
लेकिन जो महरून रंग के,
वो लगते हैं मीठे,
पर्वत से शृंगार उतर कर,
मैदानों में आया।
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सुंदर व मनोहारी रचना , आदरणीय धन्यवाद !
जवाब देंहटाएं|| जय श्री हरिः ||
वाह पानी आ गया मुँह में :)
जवाब देंहटाएंवाह
जवाब देंहटाएंबढ़िया प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंगुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना !
वाह क्या खूब र ! गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामना ! विषयानुकूल स्वादु रचना
जवाब देंहटाएंमौसम की मार झेलकर,
जवाब देंहटाएंकितने हुए रसीले,
बारिश का पानी पीकर,
हो जाते नीले-पीले,
बच्चों और बड़ों ने इनको
बहुत चाव से खाया।
bahut sundar v rasili prastuti .aabhar
सुंदर, मीठी..फलदार रचना :)
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