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गुरुवार, 5 अप्रैल 2018

गीत "माता का सम्मान करो" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

माता का सम्मान करो,
जय माता की कहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।

झाड़ और झंखाड़ हटाकर, राह बनाना सीखो,
ऊबड़-खाबड़ धरती में भी, फसल उगाना सीखो,
गंगा में स्नान करो,
कीचड़ में रहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।

बेटों के जैसा ही, बेटी से भी प्यार करो ना,
नारी से नर पैदा होते, ये भी ध्यान धरो ना,
मत जीवन बरबाद करो,
दुनिया में रहने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।

दया-धर्म और क्षमा-सरलता, ही सच्चे गहने हैं,
दुर्गा-सरस्वती-लक्ष्मी ही, अपनी माता-बहनें हैं।
घर अपना आबाद करो,
पूजन-वन्दन करने वालों।
भूतकाल को याद करो,
नवयुग में रहने वालों।।

3 टिप्‍पणियां:

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