"उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा।

मित्रों!

आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है।

कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...!

और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।

यह ब्लॉग खोजें

समर्थक

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

दोहे "सावन का उपहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

सावन आने पर धराकरती है शृंगार।
हरा-भरा परिवेश हैसावन का उपहार।१।
--
चोटी-बिन्दी-मेंहदीआपस में बतियाय।
हर्ष और अनुराग मेंसुहागिनें बौराय।२।
--
तीजों के त्यौहार पर, कर सोलह सिंगार।
आज नारियाँ हर्ष सेगातीं मेघ-मल्हार।३।
--
आँगन में झूले पड़ेझूल रहीं हैं नार।
घेवर-फेनी से सजाहलवाई बाजार।४।
--
नागपञ्चमी पर लगीदेवालय में भीड़।
कानन में सब खोजतेनागदेव के नीड़।५।
--
सोमवार के दिन सभी, मन्दिर जाते लोग।
शिव-शंकर को प्यार से, लगा रहे हैं भोग।६।
--
काँवड़ लेकर आ रहे, श्रद्धा से अनुरक्त।
हर-हर, बम-बम घोष को, करते सारे भक्त।७।
--
गंगा जी के घाट पर, लम्बी लगी कतार।
लोग नहाने जा रहे, हर-हर के हरद्वार।८।
--
आता सावन मास मेंरक्षाबन्धन पर्व।
जब करती बहनें तिलकभाई करता गर्व।९।
--
बहनें करतीं कामनाभाई हो खुशहाल।
भाई की लम्बी उमरमाँग रहीं हर साल।१०।

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (08-08-2018) को "सावन का सुहाना मौसम" (चर्चा अंक-3057) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    उत्तर देंहटाएं
  2. सावन का आँखों देखा हाल बयान करते हैं शास्त्रीजी के दोहे :
    --
    तीजों के त्यौहार पर, कर सोलह सिंगार।
    आज नारियाँ हर्ष से, गातीं मेघ-मल्हार।३।
    --
    आँगन में झूले पड़े, झूल रहीं हैं नार।
    घेवर-फेनी से सजा, हलवाई बाजार।४।

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रकृति की अनुपम छटा सावन में देखने को मिलती हैं
    बहुत सुन्दर सामयिक रचना

    उत्तर देंहटाएं

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथासम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।

LinkWithin

Related Posts with Thumbnails