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शनिवार, 25 अगस्त 2018

गीत "बहना करती है मनुहार" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

हरियाला सावन ले आया, राखी का त्यौहार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, भाई-बहन का प्यार।।

दूर देश से चलकर बहना, बाबुल के घर आई,
सूनी ना रह जाये भइया, तेरी आज कलाई,
ममता की पावन डोरी ने, बाँध लिया संसार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, भाई-बहन का प्यार।।

गूँथ लाई राखी में बहना, मन के माणिक-मोती,
भइया को मिष्ठान्न खिलाकर, खुश कितनी है होती,
रोली, अक्षत और तिलक में, भरे हुए उद्गार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, भाई-बहन का प्यार।।

बहनें नहीं माँगती भइया, राखी का प्रतिदान,
संकट में अपनी बहनों का, रखना इतना ध्यान,
कभी बहन के लिए नेह का, बन्द न करना द्वार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, भाई-बहन का प्यार।।

एक कोख से जन्म लिया है, इक आँगन में खेले,
साथ-साथ बचपन में हमने, देखे कितने मेले,
जीवन भर भाई की, बहना करती है मनुहार।
अमर रहा है, अमर रहेगा, भाई-बहन का प्यार।।

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