|
--
देते मुझको हौसला, कदम-कदम पर मीत।
बन जाते हैं इसलिए, ग़ज़लें,
दोहे-गीत।।
--
शब्द और व्याकरण का, मुझे नहीं कुछ
ज्ञान।
इसीलिए करता नहीं, मैं झूठा अभिमान।।
--
टंकण कर लेता तभी, जब आते कुछ भाव।
शब्दों में करता नहीं, जोड़-तोड़
बदलाव।।
गीत-ग़ज़ल दोहे लिखे, किये कई
अनुवाद।
रचनाओं से स्वयं की, करता खुद
संवाद।।
नहीं मुझे यह ज्ञात है, कैसे बनते
छन्द।
किन्तु नित्य लिखकर मुझे, मिलता है आनन्द।।
--
कंकड़-काँटों से भरी, राह बहुत
विकराल।
फिर भी प्रतिदिन लक्ष्य पर, सीधी
चलता चाल।।
--
जब भी आकर घेरते, जीवन में अवरोध।
करवाते हैं भूल का, तब वो मुझको बोध।।
--
मेरे मन की बात को, श्लाघा कहते लोग।
लेकिन तन-मन में बसा, लिखने का है
रोग।।
--
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

डॉक्टर रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ! हमारी प्रार्थना है कि लिखने के इस रोग से आपको कभी मुक्ति न मिले !
जवाब देंहटाएंबहुत खूब... सुंदर रचना ,सादर नमन सर
जवाब देंहटाएं