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गुरुवार, 9 सितंबर 2021

गणेश चतुर्थी पर विशेष "गणनायक भगवान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सबसे पहले आपकी, पूजा होती देव।
सबकी रक्षा कीजिए, जय-जय गणपतिदेव।।
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विघ्नविनाशक आप हो, सभी गणों के ईश।
पूजा करते आपकी, सुर-नर और मुनीश।।
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करता है आराधना, मन से सकल समाज।
बिना आपके तो नहीं, होता मंगल काज।।
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दीपों के त्यौहार में, होता दिव्य निवेश।
घर में लाते हैं सभी, लक्ष्मी और गणेश।।
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पार्वतीनन्दन प्रभो, शिवजी के हो पूत।
नहीं आपकी दृष्टि में, कोई वृन्द अछूत।।
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शुक्ल चतुर्थी से शुरू, चतुर्दशी अवसान।
दस दिन रहता देश में, श्रद्धा का उन्वान।।
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सॉँझ-सवेरे आरती, उसके बाद प्रसाद।
होता है दरबार में, घण्टा-ध्वनि का नाद।।
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गणनायक भगवान की, महिमा बहुत अनन्त।
कृपा आपकी हो अगर, जीवन बने बसन्त।।
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मोदक हैं प्रिय आपको, गणनायक भगवान।
बनकर वाहन आपका, मूषक हुआ महान।।

9 टिप्‍पणियां:

  1. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार(१०-०९-२०२१) को
    'हे गजानन हे विघ्नहरण '(चर्चा अंक-४१८३)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. वह .... गणपति जी के शानदार दोहे ... मज़ा आ गाय सर ...
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक बधाई हो ...

    जवाब देंहटाएं
  3. बेहद खूबसूरत दोहे..
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय।

    जवाब देंहटाएं
  4. बेहतरीन दोहे ।
    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ ।

    जवाब देंहटाएं
  5. गजानन महाराज के बहुत सुन्दर दोहे प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!
    गणेशोत्सव की बहुत-बहुत हार्दिक मंगलकामनाएं

    जवाब देंहटाएं
  6. सुंदर प्रस्तुति... गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएँ...

    जवाब देंहटाएं
  7. गणपति को अर्पित सुंदर भाव भरी उत्कृष्ट प्रार्थना ।

    जवाब देंहटाएं

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