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शनिवार, 4 सितंबर 2021

दोहे "अध्यापक की बात" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

राधाकृष्णन आपको, नमन हजारों बार।

अध्यापक-दिन का दिया, भारत को उपहार।1।

--

धन्य हुए गुरुजन सभी, पाकर यह सौगात।

आओ आज के दिन करें, अध्यापक की बात।2।

--

जो कहलाता था कभी, प्रभु से अधिक महान।

आज घटा क्यों देश में, उस शिक्षक मान।3।

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अब कक्षोन्नति के लिए, गुरू बना सोपान।

फिर कैसे हो पायगा, गुरुओं का सम्मान।4।

--

जब से शिक्षा-दान का, बदल गया अन्दाज।

तब से शिक्षक दिन बना, केवल एक रिवाज।5।

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बिकता महँगे दाम पर, गुरुओं के घर ज्ञान।

गणित और विज्ञान की, खुली हुई दूकान।6।

--

कहाँ पढ़ाएँ पाल्य को, अभिभावक हैरान।

गली-गली में खुल गयीं, शिक्षा की दूकान।7।

--

अध्यापकदिन पर सभी, गुरुवर करें विचार।

बन्द करें अपने यहाँ, ट्यूशन का व्यापार।8।

5 टिप्‍पणियां:

  1. शिक्षक दिवस पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को सादर नमन । बहुत सुंदर समसामयिक रचना ।

    जवाब देंहटाएं
  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा रविवार(०५ -०९-२०२१) को
    'अध्यापक की बात'(चर्चा अंक- ४१७८)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  3. मनन एवं नमन योग्य दोहे ।

    जवाब देंहटाएं
  4. डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को सादर नमन। बहुत सुंदर रचना।

    जवाब देंहटाएं

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