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गुरुवार, 28 फ़रवरी 2019

दोहे "सक्षम भारतवर्ष" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

जब से जन्मा जगत में, पापी पाकिस्तान।
साजिश तब से कर रहा, वो बन कर शैतान।।

जब-जब पाकिस्तान ने, किया यहाँ उत्पात।
तब-तब भारतवर्ष से, मिली उसे है मात।।

बीते सत्तर साल में, हरदम रहा खिलाफ।
ऐसे बेईमान को, कैसे कर दें माफ।।

बात-चीत होगी तभी, जब होंगे दिल साफ।
लेकिन होना चाहिए, सही-सही इंसाफ।।

सीमाओं पर देश की, हैं जवान तैनात।
बैरी को जो दे रहे, कदम-कदम पर मात।।

फैलाते जो देश में, जगह-जगह आतंक।
मानवता के नाम पर, समझो उन्हें कलंक।।

बुरे काम का तो बुरा, होता है निष्कर्ष।
अपनी रक्षा के लिए, सक्षम भारतवर्ष।।

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