-- नये साल का आगमन, लाया है सौगात। पर्व लोहड़ी में करो, सबसे मीठी बात।। -- कुदरत ने हमको दिया, षड ऋतुओं का दान। खेतों ने पहना हुआ, पीताम्बर परिधान। -- शैल शिखर पर हो रहा, जम करके हिमपात। तिल-गुड़ की की दे दीजिए, अपनों को सौगात।। -- सरदी में अच्छा लगे, खिचड़ी का आहार। मूँगफली खाकर करो, तन के दूर विकार।। -- उत्तरायणी-लोहड़ी, देती है सन्देश। थोड़े दिन के बाद में, सुधरेगा परिवेश।। -- झड़बेरी पर छा गये, खट्टे-मीठे बेर। धूप सेंकने कोकिला, बैठी है मुंडेर।। -- सरसों फूली खेत में, लहर-लहर लहराय। षटपद-मधु की मक्खियाँ, गुन-गुन गीत सुनाय।। -- मिलजुल कर सब प्रेम से, भँगड़ा करते लोग। लोहड़ी में उत्साह से, लगा रहे हैं भोग।। -- |
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तिल, गुड़, सरसों, बेर और मूँगफली के रस में सिक्त सुंदर दोहे
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कलरविवार (15-1-23} को "भारत का हर पर्व अनोखा"(चर्चा अंक 4635) पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है,आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ायेगी।
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कामिनी सिन्हा
कोकिला धुप सेंकने मुंडेर पर बैठी है। इन सुन्दर दोहों के साथ कुछ दिन हम सब भी प्यारी धूप का भरपूर आनंद लें। अद्भुत है आ. शास्त्री 'मयङ्क' जी का रचना संसार!
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर !
जवाब देंहटाएंहमारे पर्व हम में आशा का संचार करते हैं और हम में एक नई ऊर्जा भर देते हैं.
सुंदर सरस दोहे त्योहार अनुरूप।
जवाब देंहटाएंमकर संक्रांति पर हार्दिक शुभकामनाएं।
शरद ऋतु के जीवन संदर्भ पर सुंदर मोहक दोहे । आनंद में डुबा गए
जवाब देंहटाएंबधाई और शुभकामनाएं आदरणीय सर।
बेहतरीन रचना आदरणीय मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
जवाब देंहटाएंअति सुन्दर सृजन, सभी पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं
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