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गुरुवार, 8 अक्तूबर 2009

"एक पाती सजनी के नाम" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

:शरद कोकास जी को समर्पित:
!! करवा-चौथ की शुभकामनाएँ !!

जब भी दीप जलाया तुमने अक्स हमारा देखा।
चन्दा की गोलाई में भी नक्स हमारा देखा।।

मैंने जब दर्पण देखा प्रतिरूप तुम्हारा पाया।
मेरे साथ तुम्हारा हरदम रूप उभर कर आया।।
बाहर की दौलत का क्या है, केवल आनी-जानी है।
अन्तरतम की प्यारभरी दौलत जग ने मानी है।।
जब तक सूरज-चाँद रहेंगे, प्यार करूँगा मन से।
मोह कभी नही भंग करूँगा मैं अपने प्रियतम से।।

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही बढिया... एक पत्निभगत पति के अन्तर्मन से निकली प्यार की अनमोल पाति.चित्रों ने भावनाओं को और ऊंचाई दे डाली है

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  2. वाह,
    फूल नहीं, तितली नहीं चाँद नहीं अफताब नहीं !
    यही जबाब है मेरा, कि आपका कोई जबाब नहीं !

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  3. मैंने जब दर्पण देखा प्रतिरूप तुम्हारा पाया।
    मेरे साथ तुम्हारा हरदम रूप उभर कर आया।।

    Shastri ji, bahut badhiya bhav vyakt kiya aapne ..badhayi.sundar geet

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर सामयिक स्नेह की पाति है बधाई और शुभकामनायें

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  5. बहुत खूब शास्त्री जी बहुत खूब !!

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  6. बना रहे ये प्यार,किसी की नज़र ना लगे।

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  7. मस्त आपका लिखने का भाव काबिले तारीफ़ है

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  8. जब तक सूरज-चाँद रहेंगे, प्यार करूँगा मन से।
    मोह कभी नही भंग करूँगा मैं अपने प्रियतम से।।


    wah! bahut hi achcha.in panktiyon ne man moh liya.........

    जवाब देंहटाएं
  9. वाह पत्नी प्रेम झलक रहा है कविता में बहुत सुंदर.

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  10. चाँद में चाँदनी, चाँदनी में चाँद!
    प्रेम का अद्भुत सम्मिश्रण है!

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  11. अद्भुत!! चित्र ही सब कुछ कह गया!!

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  12. बाहर की दौलत का क्या है, केवल आनी-जानी है।
    अन्तरतम की प्यारभरी दौलत जग ने मानी है।। ....prem ka behatareen path padhane ke liye dhanyabad....

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  13. वाह वाह क्या बात है शास्त्री जी ! इसे कहते हैं बेपन्हा मोहब्बत ! भाभी जी के लिए आपने एक अनमोल तोहफा पेश किया है ! इतना ख़ूबसूरत रचना और तस्वीर ने तो सब कुछ कह दिया! सबसे बेहतरीन रचना रहा आपका ये अब तक का और अत्यन्त सुंदर तस्वीर!

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  14. डॉक्टर साह्ब नमस्कार । करवा चौथ के बाद से ही पत्नीवृता धर्म के पालन में इस तरह से जुटा रहा कि यहाँ आपसे सम्वाद करने नहीं आ सका । बहुत सुन्दर भाव हैं आपकी इस रचना में । और इस समपर्ण के लिये मै आपका कृतज्ञ हूँ ।

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  15. पुनश्च: आपके और आदरणीया भाभीजी के चित्र को एकाकार करने का यह प्रयोग अच्छा लगा ..ऐसा ही सदा आप दोनो के जीवन मे हो यह कामना । मेरी बिटिया कोपल को इस ब्लॉग पर लगा यशोदा मैया और कान्हा का चित्र बहुत सुन्दर लगा । - भवदीय शरद कोकास

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