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रविवार, 11 अक्तूबर 2009

"चलता-फिरता हास्य" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

गुड्डी के आगे-पीछे है, गुड्डा हिन्दुस्तान में।
गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।

पहले दोनों साथ-साथ में गाते मधुर तराने थे,
सुर से सुर मिल जाते थे दोनों के सुन्दर गाने थे,
सपना चकनाचूर हुआ, जब आया जूस उफान में।
गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।

जैसे ही सुर बिगड़ा, तबले का बन गया नगाड़ा है,
चोटी खींच रहा है कोई, कोई खींचता नाड़ा है,
कुश्तम-कुश्ता शुरू हो गयी,  दोनों हैं मैदान में।
गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।

(सभी चित्र गूगल सर्च से साभार)

26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब
    ये ब्लोगिस्तान का बुड्ढा है कौन

    जवाब देंहटाएं
  2. जैसे ही सुर बिगड़ा, तबले का बन गया नगाड़ा है,
    चोटी खींच रहा है कोई, कोई खींचता नाड़ा है,
    कुश्तम-कुश्ता शुरू हो गयी, दोनों हैं मैदान में।
    गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।................................../////////////////////////////////////////////खूब........बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  3. यह ब्लॉगिस्तान के लिए एकदम अनूठी रचना है,
    पर एक बात अच्छी नहीं लगी ... ... .

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत ही उम्दा...........

    मज़ा आ गया............

    ----अच्छा नगाड़ा बजाया दोनों का...........हा हा हा

    जवाब देंहटाएं
  5. बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।

    kaun hai bhai?

    जवाब देंहटाएं
  6. जैसे ही सुर बिगड़ा, तबले का बन गया नगाड़ा है,

    चोटी खींच रहा है कोई, कोई खींचता नाड़ा है,

    कुश्तम-कुश्ता शुरू हो गयी, दोनों हैं मैदान में।

    गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।

    बेचारा बुड्ढा ! हा-हा-हा....!

    जवाब देंहटाएं
  7. बुढा गुडिया कहीं भी जाए, बस आप तो बने रहें ब्लॉगिस्तान में...

    जवाब देंहटाएं
  8. रवि जी!
    यह तो हास्य है।
    एक कवि होने के नाते अपने आस-पास होने वाली हलचल से आँखें भी तो नही मूँदी जा सकती।
    फिर भी कोई कमी रह गई हो तो इंगित कर दे।
    अभी इस कविता में बहत गुञ्जाइस है।

    जवाब देंहटाएं
  9. पर एक बात अच्छी नहीं लगी ... ... .

    अरे, यह बुड्ढा कौन है?

    यह तो आपने बताया ही नहीं!

    जवाब देंहटाएं
  10. वाह...बहुत खूब....!
    बुड्ढे और गुड़िया को आप सभी लोग समझते हैं।
    फिर भी मुझसे ठग-ठग कर पूछ रहें हैं।

    जवाब देंहटाएं
  11. हमारा सामान्‍य ज्ञान कुछ कम है, हमें ना तो बुढढा पहचान आ रहा है और ना ही गुडिया। लेकिन तुकबन्‍दी है मजेदार। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  12. गुड़िया बसी विदेशों में, और बुड्ढा ब्लॉगिस्तान में।।
    गुडिया कोन से देश मै है कोई अता पता दो तो हम उस से बात कर के समजाये कि बुड्ढा दुसरी गुडिया ढुढ रहा है....
    वेसे हमारी समझदानी मै कुछ नही पडा कि माजरा क्या है??

    जवाब देंहटाएं
  13. गुडिया अभी तक गुडिया ही है ?
    ज़रूर कोई ग़लतफ़हमी हो गयी है.
    वैसे मज़ा आ गया. भई , वाह.

    जवाब देंहटाएं
  14. Australia wali Gudiya ka kissa khatam nahin hua..mahabharat jaari hai.

    'UK wali' gudiya ,India mein hi rahti hai.

    Dono aati hongi abhi.

    जवाब देंहटाएं
  15. वाह ! बहुत खूब! बढ़िया लगा!

    जवाब देंहटाएं
  16. गजब का डायनामिक हास्य ।
    आभार ।

    जवाब देंहटाएं
  17. बहुत खूब है ये गुडिया भी और बुढा भी ..

    जवाब देंहटाएं
  18. बहुत दिनों से बाहर-बाहर, घिरा मैं नखलिस्तान में !
    कैसे लिख दूँ गज़ब बात है, आपके ब्लोगिसतान में !!
    सादर, आ.

    जवाब देंहटाएं
  19. शास्त्री जी, गंभ्हेर रचनाएँ छोड़कर यह मस्त मौला रचना भी अच्छी लगी....ऐसा लगा होली (फाग) की छेड़-छाड़ आप दीवाली पर कर रहे हैं...मजेदार

    जवाब देंहटाएं

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