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सोमवार, 17 अक्तूबर 2011

"किसी के सुर नहीं मिलते" ( डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")

सजे कैसे कोई महफिल, किसी के सुर नहीं मिलते
बहुत ऐसे भी गुलशन हैं, जहाँ पर गुल नहीं खिलते
 
दिलों में दूरियाँ, लेकिन दिखावा प्यार का होता
सभी है नाम के दर्जी, फटी चादर नहीं सिलते
 
चलें गोली, फटें गोले, नहीं मतलब किसी को है
जहाँ मुर्दार बस्ती हो, वहाँ नरमुण्ड नहीं हिलते,
 
विदेशी खून के धारे, नसों में जिनकी बहते हों
वहाँ पर देश भक्तों के, कभी चेहरे नहीं खिलते
 
सजेगा रूप अब कैसे, यहाँ केशर की क्यारी का
रिसाले अब अहिंसा के, दुकानों में नहीं मिलते

24 टिप्‍पणियां:

  1. सजेगा “रूप” अब कैसे, यहाँ केशर की क्यारी का
    रिसाले अब अहिंसा के, दुकानों में नहीं मिलते

    वाह वाह! बहुत ही बेहतरीन लिखा है शास्त्री जी... हर एक शे'अर बहुत ही बेहतरीन!

    जवाब देंहटाएं
  2. आह, क्या खूबसूरत ग़ज़ल है यह शास्त्री जी। बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. bahut prabhaavshali rachna.badhaai.mera blog aapka intjaar kar raha hai.

    जवाब देंहटाएं
  4. सामयिक दृश्यों पर खूबसूरत रंग बिखेरे हैं.गहन और अति गूढ़ चिंतन समाया है हर पंक्ति में,हम पढ़ कर धन्य हुए.

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत गजब का लिखा है सर!
    ----
    कल 18/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
  6. चलें गोली, फटें गोले, नहीं मतलब किसी को है
    जहाँ मुर्दार बस्ती हो, वहाँ नरमुण्ड नहीं हिलते,

    गजब का लिखा है...

    Agree.

    जवाब देंहटाएं
  7. आज के समय को दर्शाती अच्छी प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  8. बेहतरीन प्रस्‍तुति।
    जीवन की सच्‍चाई छुपी है आपके शब्‍दों में।

    जवाब देंहटाएं
  9. सजेगा “रूप” अब कैसे, यहाँ केशर की क्यारी का रिसाले अब अहिंसा के, दुकानों में नहीं मिलते
    bahut khoobsurat pangtiyan hain.....

    जवाब देंहटाएं
  10. प्रवाहपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति!

    जवाब देंहटाएं
  11. बहुत बेधक रचना है सर...
    सादर नमन...

    जवाब देंहटाएं
  12. सजेगा “रूप” अब कैसे, यहाँ केशर की क्यारी का
    रिसाले अब अहिंसा के, दुकानों में नहीं मिलते

    आजकल तो एक से बढकर एक रचनायें आ रही है……………शानदार प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  13. बहुत खूब.....शानदार प्रस्तुति।

    जवाब देंहटाएं
  14. बहुत सुन्दर! बेहतरीन प्रस्तुती!

    जवाब देंहटाएं

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