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शनिवार, 26 नवंबर 2011

"खार पर निखार है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")



है नशा चढ़ा हुआ, खुमार ही खुमार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

मुश्किलों में हैं सभी, फिर भी धुन में मस्त है,
ताप के प्रकोप से, आज सभी ग्रस्त हैं,
आन-बान, शान-दान, स्वार्थ में शुमार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

हो गये उलट-पलट, वायदे समाज के,
दीमकों ने चाट लिए, कायदे रिवाज़ के,
प्रीत के विमान पर, सम्पदा सवार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

अंजुमन पे आज, सारा तन्त्र है टिका हुआ,
आज उसी वाटिका का, हर सुमन बिका हुआ,
गुल गुलाम बन गये, खार पर निखार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
राम के ही देश में, राम बेकरार है।
तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

24 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद सुन्दर ... कितने भाव है .. पर लय है गीत है... खूबी आपकी ..सादर

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बढ़िया कविता... व्यंग भी भाव भी...

    जवाब देंहटाएं
  3. न जाने किस अधिकता का लक्षण है यह बुखार..

    जवाब देंहटाएं
  4. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    राम के ही देश में, राम बेकरार है।
    तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

    गज़ब की व्यंग्यात्मक रचना है………बहुत खूब्।

    जवाब देंहटाएं
  5. आपकी कविता फैक्ट्री से निकली हर कविता.....अपने भाव और व्यंग्य में हर बार की तरह इस बार भी खरी उतरती है ............आभार

    जवाब देंहटाएं
  6. हो गये उलट-पलट, वायदे समाज के,
    दीमकों ने चाट लिए, कायदे रिवाज़ के,
    प्रीत के विमान पर, सम्पदा सवार है।

    बहुत बढ़िया गीत सर..
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  7. बेहतरीन शब्द समायोजन..... भावपूर्ण अभिवयक्ति....

    जवाब देंहटाएं
  8. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    राम के ही देश में, राम बेकरार है।

    bahut achhee panktiyaan

    जवाब देंहटाएं
  9. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    कटु यथार्थ।

    जवाब देंहटाएं
  10. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    राम के ही देश में, राम बेकरार है।
    तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।

    ....बहुत सटीक और लाज़वाब प्रस्तुति..

    जवाब देंहटाएं
  11. अंजुमन पे आज, सारा तन्त्र है टिका हुआ,
    आज उसी वाटिका का, हर सुमन बिका हुआ,
    गुल गुलाम बन गये, खार पर निखार है।

    वाह ! बहुत तीक्ष्ण...

    जवाब देंहटाएं
  12. दीमकों मे चाट लिए कायदे रिवाज के .... साची बात कहता बहुत सुंदर गीत...
    समय मिले कभी तो आयेगा मृ पोस्ट पर आपका स्वागत है http://mhare-anubhav.blogspot.com/

    जवाब देंहटाएं
  13. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    बेहद सुन्दर ...!

    जवाब देंहटाएं
  14. उम्मिदें हुईं नहीं अभी तार-तार हैं,
    चाटां पडा गाल पे यह बेबसों का उपहार है।

    जवाब देंहटाएं
  15. सुंदर प्रस्तुति,..
    लगता है मेरे पोस्ट तक आने के लिए आपके पास समय नही है,फिर भी आपका इन्तजार करूगाँ....

    जवाब देंहटाएं
  16. झूठ के प्रभाव से, सत्य है डरा हुआ,
    बेबसी के भाव से, आदमी मरा हुआ,
    राम के ही देश में, राम बेकरार है।
    तन-बदन में आज तो, बुखार ही बुखार है।।


    बहुत खूब ...

    जवाब देंहटाएं
  17. अंजुमन पे आज, सारा तन्त्र है टिका हुआ,
    आज उसी वाटिका का, हर सुमन बिका हुआ,

    यथार्थ !!, सुन्दर अभिव्यक्ति --साधुवाद ,

    जवाब देंहटाएं

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