गुरुवार, 21 नवंबर 2019

गीत "अनुभावों की छिपी धरोहर" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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गीत और ग़ज़लों वाला जो सौम्य सरोवर है।
मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।
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शब्द हिलोरें लेते जब भी इस रीती गागर में,
देता हैं उडेल सब उनकोधारा बन सागर में,
उच्चारण में ठहर गया जीवन्त कलेवर है।
मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।
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पगडण्डी है वही पुरानीजिसको मैंने अपनाया है,
छन्दों का संसार सनातनमेरे मन को ही भाया है,
छल-छलकल-कल करती गंगा बहुत मनोहर है।
मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।
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पर्वत मालाएँ फैली हैंकितनी धरा-धरातल पर,
किन्तु हिमालय जैसा कोई, नहीं दूसरा भूतल पर,
जो अरिदल से रक्षा करता वही महीधर है।
मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।
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बेच रहे ऊँचे दामों मेंस्वादहीन पकवानों को,
शिक्षा की बोली लगती हैऊँचे भव्य मकानों में,
जो बहनों की लाज बचातावही सहोदर है।
मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।
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15 टिप्‍पणियां:

  1. मैंने अभी आपका ब्लॉग पढ़ा है, यह बहुत ही शानदार है।
    Santali Mp3 Download

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  2. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (22-11-2019 ) को ""सौम्य सरोवर" (चर्चा अंक- 3527)" पर भी होगी।
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिये जाये।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    -अनीता लागुरी'अनु'

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  3. बहुत सुंदर गीत , सुंदर भाव उत्कृष्ट शब्द संयोजन।

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  4. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 14-05-2021) को
    "आ चल के तुझे, मैं ले के चलूँ:"(चर्चा अंक-4060)
    पर होगी। चर्चा में आप सादर आमंत्रित है.धन्यवाद

    "मीना भारद्वाज"

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  5. जी बढ़िया है। कई विषययों पर आपने विचार करने योग्य बातें लिखी है...

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  6. उच्चारण में ठहर गया जीवन्त कलेवर है।
    मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।---बहुत शानदार आदरणीय।

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  7. आपका छंद प्रेम और उसके प्रति प्रतिबद्धता अनुकरण के योग्य है।
    सादर।

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