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गुरुवार, 18 जुलाई 2019

दोहे "अखबारों में नाम" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

वृक्षारोपण की लगी, आज सब जगह होड़।
सबने पौधे रोपकर, दिये अधर में छोड़।।
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गत वर्षों की पौध का, बचा न नाम-निशान।
अधिकारीगण आँकड़े, करते खूब बखान।।
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महज दिखावे के लिए, सब सरकारी काम।
यहाँ सभी को चाहिए, अखबारों में नाम।।
--
रोपो पौधे कम भले, लेकिन करो रखाव।
लेकिन धरती के लिए, रखिए सेवा-भाव।।
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शाक-पात, फल-फूल-जल, देती हमें जमीन।
लेकिन सब भू-सम्पदा, के दोहन में लीन।।
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बहुत घिनौनी हो गयीं, लोगों की करतूत।
छल से लोग कमा रहे, धन-सम्पदा अकूत।।
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सबको अपनी ही पड़ी, जाय भाड़ में देश।
भारत माँ का कर रहे, ये दूषित परिवेश।।
--

1 टिप्पणी:

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