प्रस्तुत है-
यह मुक्तक-बाल कविता!
इसको अपना मधुर स्वर दिया है-
अर्चना चावजी ने!
मानसून का मौसम आया,
तन से बहे पसीना!
भरी हुई है उमस हवा में,
जिसने सुख है छीना!!
कुल्फी बहुत सुहाती हमको,
भाती है ठण्डाई!
दूध गरम ना अच्छा लगता,
शीतल सुखद मलाई!!
पंखा झलकर हाथ थके जब,
हमने झूला झूला!
ठण्डी-ठण्डी हवा लगी तब,
मन खुशियों से फूला!!
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जय हो -
जवाब देंहटाएंखुबसूरत बाल मुक्तक-
बधाई आदरणीय गुरुवर
वाह, आनन्दित..
जवाब देंहटाएंबहुत खूबसूरत
जवाब देंहटाएंसुन्दर, अति सुन्दर
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रफ़ुल्लित करती रचना.
जवाब देंहटाएंरामराम.
khoobshurat rachna
जवाब देंहटाएंसुन्दरतम रचना
जवाब देंहटाएंवाह बहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंसादर
kya baat hai...
जवाब देंहटाएंमेरी नयी पोस्ट आपके इंतज़ार में है !
एक चटका यहाँ भी लगाइये :
http://raaz-o-niyaaz.blogspot.com/2013/07/blog-post.html
आनंद आ हाय इसको पढ़के ... ठंडक आ गई ...
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