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मंगलवार, 24 सितंबर 2019

दोहे "रोटी भरती पेट" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

फूली रोटी देखकरमन होता अनुरक्त।
हँसी-खुशी से काट लोजैसा भी हो वक्त।१।
--
फूली-फूली रोटियाँसजनी रही बनाय।
बाट जोहती है सदाकब साजन घर आय।२।
--
घर के खाने में भराघरवाली का प्यार।
सजनी खाने के लिएकरती है मनुहार।३।
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फूली-फूली रोटियाँमन को करें विभोर।
इनको खाने देश मेंआते रोटीखोर।४।
--
नगर-गाँव में बढ़ रहेअब तो खूब दलाल।
रोटीखोरों ने कियावतन आज कंगाल।५।
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रोटी का अस्तित्व हैजीवन में अनमोल।
दुनिया में सबसे बड़ारोटी का भूगोल।६।
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रोटी सबका लक्ष्य हैरोटी है तकदीर।
रोटी के बिन जगत मेंचलता नहीं शरीर।७।
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जीवन जीने के लिएरोटी है आधार।
अगर न होती रोटियाँमिट जाता संसार।८।
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हो रोटी जब पेट मेंभाते तब उपदेश।
रोजी-रोटी के लिएजाते लोग विदेश।९।
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तब रोटी अच्छी लगे, जब लगती है भूख। 
कुनबे और पड़ोस मेंअच्छे रखो रसूख।१०।
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बाहर खाने में नहींआता कोई स्वाद।
होटल में जाकर सदाहोता धन बरबाद।११।
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दौलत के बाजार मेंबिकते रोज रसूख।
रोटी की कम भूख हैधन की ज्यादा भूख।१२।
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खाकर माल हराम काकरना मत आखेट।
श्रम से अर्जित रोटियाँभरती सबका पेट।१३।
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3 टिप्‍पणियां:

  1. नगर-गाँव में बढ़ रहे, अब तो खूब दलाल।
    रोटीखोरों ने किया, वतन आज कंगाल। ... तुकबंदी के माह‍िर शास्त्री जी के दोहे ... वाह बहुत खूब

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26.9.19 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3470 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

    जवाब देंहटाएं

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