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मंगलवार, 24 मार्च 2020

दोहे "नवसम्वतसर-२०७७" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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मर्यादा के साथ में, खूब मनाओ हर्ष।
स्वच्छ रहे परिवेश तो, होगा मंगल वर्ष।।
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नवसम्वतसर में हुए, चौपट कारोबार।
कोरोना के रोग से, जूझ रहा संसार।।
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माता के नवरात्र में, करो नियम से काम।
घर को मन्दिर समझकर, जपो ओम का नाम।।
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बाधाएँ सब दूर हों, करो न मेल मिलाप।
अपने घर में बैठकर, करना पूजा-जाप।।
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रोग-शोक सब दूर हों, इस पर करें विचार।
पालन कर कानून का, सबके हरो विकार।।
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जग को राह दिखा रहा, अपना भारतवर्ष।
कोरोना के रोग का, होगा अब अपकर्ष।।
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तन मन का शोधन करो, भली करेंगे नाथ।
साबुन सेधो लीजिए, बार-बार निज हाथ।।
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1 टिप्पणी:

  1. समय तो विकत है ... पर आगत का स्वागत भी जरूरी है ...
    नव संवत की हार्दिक बधाई ... सुन्दर दोहे हैं सभी ...

    जवाब देंहटाएं

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