|
-- धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं, जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं। -- हरित क्रान्ति के संवाहक, ये जन,गण के
रखवाले, प्राण प्रवाहित करने वाली, मन्द समीर बहाते हैं। -- पत्ते, फूल, मूल, फल जिनके, जीवन देने वाले हैं, देते हैं ये अन्न और अमृत सा जल बरसाते हैं। -- उपवन, आँगन, खेत, बाग में हमको पेड़ लगाने हैं, इनकी शीतल छाया में ही जीव-जन्तु सुख पाते हैं। धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से, कदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं। |
|
| "उच्चारण" 1996 से समाचारपत्र पंजीयक, भारत सरकार नई-दिल्ली द्वारा पंजीकृत है। यहाँ प्रकाशित किसी भी सामग्री को ब्लॉग स्वामी की अनुमति के बिना किसी भी रूप में प्रयोग करना© कॉपीराइट एक्ट का उलंघन माना जायेगा। मित्रों! आपको जानकर हर्ष होगा कि आप सभी काव्यमनीषियों के लिए छन्दविधा को सीखने और सिखाने के लिए हमने सृजन मंच ऑनलाइन का एक छोटा सा प्रयास किया है। कृपया इस मंच में योगदान करने के लिएRoopchandrashastri@gmail.com पर मेल भेज कर कृतार्थ करें। रूप में आमन्त्रित कर दिया जायेगा। सादर...! और हाँ..एक खुशखबरी और है...आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं। बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए। |

धारा से कुछ लेना है, तो लौटाना भी जरुरी है
जवाब देंहटाएंजी नमस्ते ,
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (२०-०९-२०२०) को 'भावों के चंदन' (चर्चा अंक-३०३८) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है
--
अनीता सैनी
बेहतरीन सृजन।
जवाब देंहटाएंसुन्दर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंउत्कृष्ट प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंउत्कृष्ट प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंवृक्ष और उनका मानव के लिए महत्त्व, सभी कुछ सरसता से समेटे सुंदर मनभावन गितिका।
जवाब देंहटाएंधरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,
जवाब देंहटाएंकदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
वाह!!!
सुन्दर ....सार्थक...।
धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,
जवाब देंहटाएंकदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
वाह!!!
सुन्दर ....सार्थक...।
धरती का तो 'रूप' अमर है पेड़ों की हरियाली से,
जवाब देंहटाएंकदम-कदम पर ये जीवन में काम हमारे आते हैं।
वाह!!!
सुन्दर ....सार्थक...।
सुंदर संदेश। सादर प्रणाम।
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर।
जवाब देंहटाएंसुंदर प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंगहन प्रस्तुति
जवाब देंहटाएंपेड़ों की उपयोगिता पर सार्थक गीतिका।
जवाब देंहटाएंअप्रतिम।
सुंदर सृजन आदरणीय ।
जवाब देंहटाएंधरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं,
जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं।